कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए नॉवेल कोरोना वायरस वुहान स्टेन कोविड-19 ने आगे कुंआ पीछे खाई वाली स्थिति उत्पन्न कर दी है। यदि मरीज कैंसर के उपचार के लिए बाहर जाते हैं तो कोविड-19 से संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है, नहीं जाते तो कैंसर बढ़ने लगता है। इससे मरीज का जीवन पूर्ण रूप से खतरे में आ जाता है। पीजीआईएमएस में कैंसर विभाग बंद होने के चलते मरीजों को दिल्ली-गुरुग्राम उपचार के लिए जाना पड़ रहा है और यहां उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
पीजीआईएमएस में कोविड-19 के संक्रमण काल में कैंसर विभाग बंद है। यहां कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी जैसी उपचार सुविधा बंद हैं। इसके चलते जिले के अलावा आसपास के लोगों को भी कैंसर के उपचार के लिए दिल्ली व गुरुग्राम जाना पड़ रहा है। दोनों ही जगह कोविड-19 का संक्रमण बड़े स्तर पर फैला हुआ है। यहां कैंसर के मरीजों का उपचार किया जा रहा है, लेकिन आने-जाने के दौरान कैंसर मरीज कोविड-19 के भी शिकार हो रहे हैं। ककराना से कैंसर का उपचार कराने गए दंपती को अब कोविड-19 का उपचार करवाना पड़ रहा है। इसके अलावा बहादुरगढ़ के मरीज को भी कैंसर के उपचार के लिए दिल्ली जाना पड़ा, दिल्ली में मरीज को कोविड-19 पॉजिटिव बता दिया गया। हालांकि मरीज की मृत्यु के बाद पीजीआईएमएस की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मरीज को कोविड-19 नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग बार-बार कर रहा अपील
कोविड-19 के संक्रमण काल में स्वास्थ्य विभाग बार-बार अपील कर रहा है कि दिल्ली व गुरुग्राम जाने वाले मरीज अपनी जानकारी दें। ककराना, बहादुरगढ़ के मरीज से पहले शहर की एक महिला भी दिल्ली में उपचार
के दौरान कोविड-19 पॉजिटिव हुई और उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसलिए विभाग दिल्ली व गुरुग्राम जाने वाले हर मरीज पर नजर रख रहा है। बार-बार आगे आकर इनसे जांच करवाने की अपील भी की जा रही है।
सवाल : अलग कैंसर विभाग होने के बावजूद चिकित्सा सुविधा नहीं
सवाल उठाया जा रहा है कि पीजीआईएमएस में कैंसर का अलग विभाग होने के बावजूद कैंसर के मरीजों का उपचार क्यों नहीं किया जा रहा है। संस्थान में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज रेडियोथैरेपी के लिए आते थे। अब इनके उपचार का क्या होगा, कोई सोचने वाला नहीं है। सूत्रों की मानें तो संस्थान में एक स्टाफ के लिए रेडियोथैरेपी भी की गई और कैंसर का ऑपरेशन करने की तैयारी है। जबकि सामान्य मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
कैंसर के मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। इसलिए संक्रमण काल में यदि वह बाहर आता है तो उसके संक्रमित होने का खतरा अधिक हो जाता है। पीजीआईएमएस कोविड अस्पताल है। यहां रेडियोथैरेपी सुविधा दी जाती है तो सोशल डिस्टेंसिंग की पालन खतरे में आ जाएगी। यदि कोई कैंसर का गंभीर मरीज आता है तो उसका ऑपरेशन भी किया जाता है और उपचार भी किया जाता है। लेकिन इस विभाग को सामान्य दिनों की तरह नहीं चला सकते।
डॉ. गजेंद्र, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआईएमएस रोहतक।
केस एक
कोविड- 19 ने सभी को परेशान कर रखा है। ऐसे में क्या कैंसर के मरीज को उपचार नहीं मिलना चाहिए। दिल्ली जाना खतरे से खाली नहीं है, पीजीआईएमएस में यदि उपचार नहीं होगा तो मरीज कहां जाएगा। प्रशासन को इस संबंध में ध्यान देना चाहिए कि कैंसर के मरीजों का उपचार बीच में नहीं रुक सकता। वह अपने एक कैंसर पीड़ित मरीज के लिए काफी परेशान हैं।
रामचंद्र शर्मा, टेक नगर, काठमंडी
केस दो
समस्या से बचने के लिए कैंसर मरीज को दिल्ली भेजते थे, लेकिन अब डर लगता है। यदि पीजीआईएमएस के कैंसर विभाग में यह सुविधा मिले तो कोई दिल्ली क्यों जाएगा। कैंसर के मरीजों को आपात सेवा में शामिल किया जाना चाहिए। जब अन्य बीमारी का उपचार हो रहा है तो कैंसर मरीज का उपचार क्यों रोका जा रहा है।
महंत कर्णपुरी, बाबा बालकपुरी डेरा।