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Rohtak News: पीजीआई ने 7 माह के हीमोफीलिया पीड़ित को दो दिन बाद ही चंडीगढ़ किया रेफर

Sun, 08 Feb 2026 04:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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24-हीमोफीलिया मरीज का कार्ड।
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अभिषेक कीरत
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रोहतक। हीमोफीलिया फैक्टर नहीं होने से पीजीआई डॉक्टर अब मरीजों को रेफर करने लगे हैं। हिसार के सात माह के बच्चे को दो दिन वार्ड में रखने के बाद चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। तर्क यही कि फैक्टर नहीं है। एक टैक्सी चालक की मौत की जांच बैठने के बाद यह ट्रेंड दिख रहा है।
करीब दो हफ्ते पहले जींद बाईपास निवासी टैक्सी चालक रविंद्र की खून रोकने का इंजेक्शन (फैक्टर-8) नहीं मिलने से मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। इसके बाद प्रबंधन ने जांच तो बैठा दी लेकिन भयावह घटना से शायद ही कोई सबक लिया।
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पूरे प्रदेश की उम्मीदों का इकलौता पीजीआई होने के बावजूद अभी तक यहां फैक्टर उपलब्ध नहीं हो सके हैं। इससे नागरिक अस्पतालों से रेफर होकर पहुंच रहे मरीजों को इलाज ही नहीं मिल पा रहा है। पीजीआई डॉक्टर फैक्टर नहीं होने का हवाला देकर मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ भेज रहे हैं।
हिसार निवासी राधिका के सात माह के बेटे को भी पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। वे बताती हैं कि दिसंबर 2025 में उसके हीमोफीलिया पीड़ित होने का पता लगा था। उसे आठ दिन नागरिक अस्पताल हिसार में रखकर 160 यूनिट फैक्टर दिए गए। सुधार न होने पर पीजीआई रेफर किया गया।
राधिका के मुताबिक, 29 जनवरी को बेटे को यहां लाए तो जांच में फैक्टर-9 की कमी पाई गई। पीजीआई में फैक्टर-8 व 9 नहीं मिले। दो दिन भर्ती रखने के बाद बच्चे को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। शुक्र है, वहां फैक्टर मिल गया। अब बच्चे को 23 फरवरी को बुलाया गया है।
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नाम न छापने का आग्रह करते हुए पीजीआई के एक डॉक्टर कहते हैं, प्रबंधन फैक्टर दे नहीं रहा। किसी मरीज को कुछ हो जाए तो डॉक्टरों के खिलाफ जांच शुरू हो जाती है। डॉक्टर आखिर करें तो क्या? इसी कारण बीच का रास्ता निकालते हुए फैक्टर की कमी वाले मरीजों को रेफर कर रहे हैं। संवाद
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