पीजीआई प्रबंधन पूरी तरह संवेदनहीन हो गया है।
यहां के स्टाफ पर मरीजों के आंसुओं और आहों का जरा भी असर नहीं हो रहा है।
मंगलवार शाम को चार नवजात बच्चों की मौत से टूटे पिता को बुधवार को पोस्टमार्टम तक के लिए रुलाया गया। प्रबंधन ने दावा किया था कि सुबह 8 बजे चारों नवजातों का पोस्टमार्टम कराके शव सौंप दिए जाएंगे।
पुलिस और परिजन सुबह आठ बजे ही डेड हाउस पहुंच गए, लेकिन दोपहर बाद तक भी पोस्टमार्टम नहीं किया गया। कागज पूरे नहीं होने के नाम पर पुलिसकर्मियों को भी खूब दौड़ाया। मजबूर पिता और पुलिस को धक्के देकर वार्ड से निकाला गया। हंगामा बढ़ता देख डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के लिए जरूरी कागजात पूरे किए।
गार्ड ने रोका पुलिस को भी
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने जांच अधिकारी एएसआई राजकुमार से कहा कि कागज पर मुहर ही नहीं लगाई। एएसआई ने उन्हें बताया कि मुहर लगाने से डॉक्टर ने इनकार कर दिया है। समरी रिपोर्ट तक नहीं दी गई है। डॉक्टर ने कहा कि आप मुहर लगवा कर लाइए। पुलिस और बच्चों के पिता दो नंबर वार्ड में मुहर लगवाने और समरी रिपोर्ट लेने गए तो उन्हें वार्ड में घुसने ही नहीं दिया गया। पुलिसकर्मी ने सख्ती दिखाई तो उसे तो जाने दिया गया, लेकिन संजीव को धक्के देकर गेट से बाहर कर दिया। दोपहर बाद जैसे तैसे कागज पूरे हुए, तब कहीं जाकर बच्चों का पोस्टमार्टम हो पाया।
बच्चों के शव दे दो और मुझे जाने दो
बच्चों के पोस्टमार्टम में उभर कर आई डॉक्टरों की खुन्नस से आहत संजीव ने कहा कि मुझे मेरे बच्चों के शव तो दे दो, मुझे यहां से जाने दो। जब पोस्टमार्टम करने में इतने नाटक किए जा रहे हैं तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सही देंगे इसका यकीन नहीं है।
ये है मामला
सोमवार रात को असंध से एक गर्भवती महिला को पीजीआई लाया गया। मंगलवार शाम को महिला ने एक साथ चार प्री-मैच्योर बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन चारों की मौत हो गई। इस पर परिजनों ने हंगामा कर दिया और आरोप लगाया कि बच्चों की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है। चार में से तीन बच्चे जिंदा थे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें गठड़ी में बांधकर दे दिया, जिससे सभी की मौत हो गई। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे मरे हुए ही पैदा हुए थे।
वर्जन
डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के लिए बुधवार सुबह आठ बजे बुलाया था। परिजन और पुलिस टीम आठ बजे से पहले ही डेड हाउस पहुंच गई। लेकिन दोपहर तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस को समरी भी नहीं दी गई। ऐसे में कहीं न कहीं लापरवाही साफ झलक रही है।
एएसआई, राजकुमार, जांच अधिकारी पीजीआईएमएस थाना रोहतक।
शाम तीन बजे पोस्टमार्टम किया गया है। लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं और दोबारा चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम कराऊंगा। पीजीआई थाने में शिकायत दी गई है, लेकिन अभी तक केस दर्ज नहीं किया गया है। केस दर्ज होने के बाद ही दम लूंगा। अभी मुझे पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई है।
संजीव, बच्चों के पिता।