33केवी सब स्टेशन एमडीयू में डबल ड्यूटी करते समय शनिवार सुबह एक ऑपरेटर की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। इससे सब स्टेशन के साथ-साथ अफसरों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया है।
सब स्टेशन पर तैनात कर्मियों के अनुसार नेहरू कॉलोनी निवासी संदीप (45) शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे ड्यूटी पर आया था। शाम को एसएसए ने उसकी रात की भी ड्यूटी लगा दी। सब स्टेशन पर ट्रेनिंग कर रहा जींद के नरवाना का विक्रम साधन नहीं मिलने पर सब स्टेशन पर ही रुक गया। रात करीब 10:30 बजे विक्रम सो गया और कुछ देर बाद भी संदीप आराम करने लगा। सुबह करीब चार बजे लाइन में फाल्ट होने पर अलार्म बजा तो संदीप उपकरणों को चेक किया और फिर लेट गया। सुबह 6:40 बजे अचानक लाइन ट्रिप हुई तो फिर अलार्म बजा मगर संदीप नहीं उठा। विक्रम ने आवाज लगाई मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया। विक्रम ने हाथों से हिलाकर उसे उठाने का प्रयास किया मगर वह नहीं उठा। विक्रम ने तुरंत एसएसए को जानकारी दी। कुछ देर में पहुंचे कर्मियों ने उसे पीजीआई पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। पुलिस के अनुसार सब स्टेशन के निरीक्षण पर कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। आशंका है कि हृदय गति रुकने से मौत हुई है। हकीकत पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेें सामने आएगी।
एक्सईएन-एसडीओ की बातें अलग-अलग
एसडीओ आरएन हुड्डा का कहना है कि मृतक संदीप डीसी रेट का कर्मी था। उसके परिवार को नियमानुसार राहत दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संदीप दिल का रोगी था और उसका उपचार काफी समय से चल रहा था। उसके हाथ में भी दिक्कत थी। वहीं, एक्सईएन सिटी मेहताब सिंह का कहना है कि संदीप आउटसोर्स कर्मी यानी ठेका कंपनी का कर्मी था। भले ही वह काफी समय से काम कर रहा था मगर डीसी रेट का नहीं था। कंपनी से कहा जाएगा कि वह उसके परिवार को आर्थिक मदद करे। वहीं, सीएमडी शत्रुजीत कपूर के आदेश हैं कि सब स्टेशनों पर रात में एक कर्मी ड्यूटी नहीं करेगा ताकि अनहोनी पर दूसरा कर्मी न सिर्फ संभालेगा बल्कि अफसरों को भी बता सकेगा। कर्मचारी नहीं होने की स्थिति में निकट के शिकायत केंद्र (जनसुविधा केंद्र) के एक कर्मी को लगाया जाए। मगर यहां सीएमडी के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा कि मौत की वजह क्या है। लगता है कि हृदय गति रुकने से कर्मी की मौत हुई है। हाथ में भी दिक्कत थी। ड्यूटी का समय बदलता है यह तो इत्तफाक है कि रात में ड्यूटी पड़ गई। एएलएम था इसलिए उसका काम तो फील्ड का है ऑफिस में नहीं लगा सकते। वैसे बता दें कि वह ठेका कंपनी का कर्मी था। हमारा कोई भी लेनादेना नहीं है हमें काम से मतलब है। कंपनी ही उसके परिवार को आर्थिक मदद देगी।
मेहताब सिंह, एक्सईएन सिटी बिजली निगम, रोहतक।