फ्रेंड्स कॉलोनी में आपबीती बताते कृष्ण। संवाद
- फोटो : संवाद
रोहतक। कुत्ते अच्छे वफादार माने जाते हैं जिसकी वजह से मानव इन्हें अपने साथ रखता है। बदलते दौर में कुत्ते रखना स्टेटस सिंबल बन गया है। यह शौक भी इस कदर हावी है कि लोग नियम न कानून की छोड़ो अपनी या दूसरों की जान की अहमियत भी नहीं समझ रहे हैं।
यही वजह है कि प्रतिबंध के बावजूद लोग पिटबुल, रोट व्हीलर नस्ल के कुत्ते पाल रहे हैं। इनका पंजीकरण तक नहीं कराया जा रहा है। दूसरी तरफ फ्रेंड्स कॉलोनी में लोग खुद डंडे लेकर कुत्तों को भगाते नजर आ रहे हैं। जिले में हिंसक होते कुत्तों का खौफ बढ़ता जा रहा है।
आए दिन कुत्तों के काटने या हमला करने के मामले सामने आ रहे हैं। पीजीआई की ओपीडी के आंकड़े पर नजर डालें तो यहां रोजाना 70 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी जा रही है। इनमें कुत्ते, बंदर व अन्य जानवरों के काटने के मामले शामिल हैं।
ओपीडी में 70 प्रतिशत मामले कुत्ते के काटने के आ रहे हैं। ऐसे में साफ है कि कुत्ते हिंसक हो रहे हैं। ऐसे में विपरीत वातावरण व माहौल में पाले जा रहे प्रतिबंधित खतरनाक नस्ल के कुत्ते जानलेवा हो सकते हैं। शहर की विभिन्न कॉलोनियों, मोहल्लों व सेक्टरों में लोग शौक के लिए खतरनाक कुत्ते पाल रहे हैं।
फ्रेंड्स कॉलोनी में आपबीती बताते कृष्ण। संवाद- फोटो : संवाद
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