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ओपीडी की भीड़ कम करने को गंभीर बीमारी के मरीजों को मिलेगी 30 दिन की दवा

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कोरोना वायरस से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग का संक्रमण को फैलने से रोकने पर जोर है। चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने के साथ पीजीआई समेत मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में मरीजों की संख्या कम करने के लिए गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को 30 दिन तक की दवा देने की तैयारी की है, ताकि मरीज बार-बार चक्कर न काटे। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में एसीएस आलोक निगम ने मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टरों को एसीएस आलोक निगम ने नई बेहतर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। यही नहीं महामारी का सबसे अहम हिस्सा रिपोर्टिंग पर भी फोकस किया गया। एसीएस ने इसका एक प्रफोर्मा बनाकर रोज के आंकड़े व मरीजों की पूरी जानकारी देने को कहा है। इसके अलावा जरूरी सामान की खरीद के लिए रेट कांट्रेक्ट करने के साथ अस्पताल में प्रयोग होने वाला गाउन व मास्क तैयार कराने के लिए टेलर हायर करने की सलाह दी। स्पेशल बजट की जरूरत पड़ी तो जारी किया जाएगा।
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एसीएस का कहना है कि आने वाले दो सप्ताह ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इन दिनों कोरोना वायरस के और फैलने की संभावना है। इसलिए एहतियान बरतने के साथ दूसरे प्रयास भी जरूरत है। इसी में भीड़ से दूरी भी शामिल है। अस्पतालों में अक्सर मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में यहां गंभीर रोगों से पीड़ितों को आम दिनों के मुकाबले तीन या पांच दिन से ज्यादा के लिए दवा देने की व्यवस्था की गई हैं। चूंकि पीजीआई प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है। यहां ओपीडी में रोजाना औसतन आठ हजार मरीज आते हैं। यही नहीं लगभग इतने ही लोग उनके साथ आते हैं। ऐसे में इस भीड़ को कम करने की जरूरत है। इसके लिए केवल गंभीर मरीज ही पीजीआई आएं। पीजीआई में बार-बार दवा के लिए आने वाले मरीजों को एक ही बार में 30 दिन तक की दवा मुहैया कराई जाए। इससे भीड़ करीब 25 प्रतिशत तक कम होगी। बैठक में पीजीआई की ओपीडी का समय भी कम करने का सुझाव रखा गया है। इस पर सीएम से बातचीत के बाद ही फैसला होगा। इसके अलावा व्यवस्था दुरुस्त बनाने के अनेक सुझाव भी आए।
लैब सैटअप करें, तुरंत खरीदें सामान
एसीएस ने पीजीआई समेत प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों को लैब सैटअप करने के निर्देश दिए हैं। वहीं करनाल व मेवात में बनने वाली लैब के खर्च के बारे में डॉ. ध्रुव ने कहा कि 50 लाख रुपये एक लैब को सैटअप करने में लगेंगे। पंचकूला में भी एक लैब शुरू किए जाने पर जोर दिया गया। इसका मकसद कोरोना वायरस पर अंकुश है। एसीएस ने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर निजी कालेजों का भी सहयोग लिया जाएगा। अग्रोहा मेडिल कालेज भी अपनी लैब शुरू करे। पहले काम करो, बिल बाद में भेजना। इसके अलावा जरूरी सामान तुरंत खरीदें। मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। पीजीआई में नई लैब के लिए 1.25 करोड़ का अनुमानित खर्च की संभावना है। इसका प्रपोजल भेजें। इस बारे में जल्द फैसला करेंगेे।
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विद्यार्थियों की छुट्टी पर हुई चर्चा
एसीएस ने एमबीबीएस, नर्सिंग व फार्मेसी विद्यार्थियों के अवकाश का मुद्दा रखते हुए सुझाव आमंत्रित किए। इसके चलते सभी ने प्रथम से तृतीय वर्ष तक के विद्यार्थियों को अवकाश देने का पक्ष लिया। जबकि अंतिम वर्ष के विद्यार्थी सीनियर का सहयोग करेंगे। इस बारे में फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। सीएम से बातचीत के बाद इस बारे में कुछ फैसला होने की उम्मीद है।
कोरोना वायरस से निपटने में पीजीआई सक्षम
डॉ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि पीजीआईएमएस कोरोना वायरस से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। यहां मास्क पर्याप्त मात्रा में हैं। वेंटिलेटर के अलावा सेनिटाइजर व दूसरी जरूरी सामान भी उपलब्ध है। भविष्य में मरीजों की संख्या के हिसाब से नई खरीद के आर्डर जल्द किए जाएंगे। प्रशिक्षण की तैयारी पूरी हो गई है।
पीजीआई में बनेगा कोरोना मानिटरिंग स्टेशन
कोरोना पर अंकुश के लिए उसकी मानिटरिंग जरूरी है। इसके लिए पीजीआई में कोरोना मानिटरिंग स्टेशन बनाया जाएगा। इस पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च होगा। यह प्रपोजल तैयार कर मुख्यालय भेज दिया गया है। इसे एसीएस शीघ्र ही पास कराने का आश्वासन दिया है।
एसीएस ने जांची पीजीआई की हेल्प लाइन
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक के दौरान एसीएस ने पीजीआई की हेल्प लाइन को परखा। बैठक में बातचीत करते हुए हेल्प लाइन का नंबर डायल कर आपरेटर से बात की। उन्होंने देरी से फोन उठाने की बात कहते हुए पहले दिन की व्यवस्था पर कटाक्ष किया।
शार्ट टेंडर पर करेंगे जरूरी चीजों की खरीद
हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. ओपी कालरा ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के महामारी का रूप लेने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। बीमारी से बचाव व मरीजों के इलाज को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। जरूरी चीजों की खरीद शार्ट टेंडर पर की जाएगी। इसकी मंजूरी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई बैठक में मिल गई है। कुछ बजट मिला है। दवा, उपकरण व अन्य जरूरी चीजें खरीदने के लिए और बजट मुहैया कराने का भी आश्वासन दिया गया है। भगत फूल सिंह मेडिकल कॉलेज व पीजीआई में कोरोना की जांच की जा रही है। इसके अलावा मेवात व करनाल कॉलेज में भी लैब बनाई जाएगी। पीजीआई के 116 वेंटिलेटर समेत प्रदेश में 190 वेंटिलेटर मरीजों के लिए मौजूद हैं। कुछ और नए वेंटिलेटर खरीदने की मंजूरी मिली है। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ कर 400 पहुंच जाएगी। मास्क, सेनिटाइजर की कालाबाजारी करने, इनकी बिक्री नहीं करने या नकली सामान बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में एसीएस ने पुलिस में केस दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
कोविड -19 की जानकारी के लिए हेल्प नंबर जारी
कोरोना वायरस नोडल अधिकारी पीजीआई के सीनियर प्रोफेसर डॉ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि एसीएस आईसीयू के वेंटिलेटर के लिए दस नये मानीटर खरीदने की मंजूरी दे दी है। इससे आईसीयू अपडेट हो जाएगा। कोविड-19 के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के साथ बीमारी की जानकारी देने व लोगों को सचेत करने के उद्देश्य से एक हेल्प लाइन नंबर जारी किया गया है। पीजीआई के कर्मचारी के पास मोबाइल 9416447071 रहेगा। इस पर 24 घंटे कोई भी व्यक्ति कोरोना संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा सरकार ने 8558593911 मोबाइल नंबर जारी किया है। बैठक में डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन राज नायक, आईडीएसपी डायरेक्टर डॉ. ऊषा गुप्ता, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सूरजभान कंबोज, डिप्टी डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. राज नारायण कौशिक, डिप्टी डायरेक्टर मेडिकल रिसर्च डॉ. प्रीति, डिप्टी डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन डॉ. गुलशन आदि मौजूद रहे।
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