सीबीएसई के 12वीं के बाद कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम पर भी अभिभावकों ने सवाल उठाया है। सोनीपत रोड स्थित एक निजी स्कूल के कुछ विद्यार्थियों को कम अंक मिलने से नाराज अभिभावकों ने बुधवार को हंगामा कर रोष प्रकट किया। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर 90 प्रतिशत पाने वाले विद्यार्थियों को 60 से 75 प्रतिशत अंक व कम अंक वालों को 90 प्रतिशत अंक देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में अभिभावकों ने शिक्षा मंत्री को ट्वीट भी किया है।
शहर के एक निजी स्कूल में बुधवार सुबह कुछ अभिभावक अपने बच्चों के साथ पहुंचे। सीबीएसई की 10वीं के परिणाम में कम अंक आने से आहत विद्यार्थियों को न्याय दिलाने के लिए अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से बात करने का प्रयास किया। यहां काफी देर इंतजार के बावजूद प्राचार्य से मुलाकात नहीं हो पाई। इससे नाराज अभिभावकों ने हंगामा किया। प्राचार्य से मिलने व बच्चों को कम अंक देने का आरोप लगाते हुए स्टाफ से नोकझोंक भी हुई। इस दौरान स्कूल प्रशासन का एक अधिकारी उनके पास आया और उन्हें पुलिस में शिकायत देने व कोर्ट जाने की बात कह कर धमकाया। इस पर अभिभावकों ने बच्चों के साथ स्कूल की ज्यादती किए जाने व जानबूझ कर कम अंक देने की बात कहते हुए न्याय की अपील की।
अभिभावक लवलीन गुप्ता, पंकज, देवेंद्र सिंह, रमेश, संदीप राठी ने कहा कि हमारे बच्चों ने प्री-बोर्ड परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। यही नहीं पिछली कक्षाओं में भी 90 प्रतिशत अंक लिए हैं। इसके बावजूद इस बार 10वीं के परिणाम में उन्हें 60 से 75 प्रतिशत की अंक दिए गए हैं। जबकि कक्षा में कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत तक अंक दिए गए हैं। उनके प्री-बोर्ड परीक्षा में भी अंक कम रहे हैं। अभिभावक अपनी जिज्ञासा लेकर स्कूल पहुंचे तो प्राचार्य या अन्य कोई बात करना तो दूर मिलने तक से इनकार कर रहा है। विद्यार्थी को दिए गए अंकों के लिए सीबीएसई के रूल का हवाला दिया जा रहा है। जबकि नंबर दिए जाने का तरीका या पिछली कक्षा के अंक छिपाए जा रहे हैं। इसलिए अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया है।
स्कूल ने रोका 9वीं कक्षा का परिणाम
कक्षा 10वीं के परिणाम में कम अंक आने पर शिकायत करने या आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों का कक्षा नौ का परिणाम भी रोक दिया गया है। स्कूलों ने यह परिणाम देने से इनकार कर दिया है। कक्षा 10वीं के बाद स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों के साथ यह समस्या ज्यादा है। यही हाल 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में किया गया है। स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों को जानबूझकर 10वीं में कम अंक दिए गए हैं।
सीबीएसई के परिणाम से कुछ अभिभावक संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें लगता है कि उनके बच्चों को 90 प्रतिशत से अधिक अंक आने चाहिए। जबकि बोर्ड ने मूल्यांकन के लिए मापदंड तय किए हैं। इसी के तहत विद्यार्थियों को अंक दिए गए हैं। सभी विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत या इससे अधिक अंक देना नामुमकिन है। बोर्ड के मापदंडों का पालन करना जरूरी है। ऐसे में सभी को 90 प्रतिशत से अधिक अंक कैसे दे सकते हैं।
- विक्रांत मायना, निदेशक, जीडी गोयनका इंनटरनेशनल स्कूल