रोहतक। दादा लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) में मंगलवार को सूर्यकवि पंडित लख्मीचंद की जयंती के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित लख्मीचंद के प्रपौत्र पंडित विष्णु दत्त की रागनियों से हुई।
पंडित विष्णु ने बताया कि पंडित लख्मीचंद ने उस समय रागनियों के माध्यम से भविष्य के बारे में बता दिया था। उन्होंने पंडित लख्मीचंद की रागनी एक बटन दबाते ही सहम चांदना हो जा के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आज वही बटन दबाते ही रोशनी हो जाती है।
कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है। पंडित लख्मीचंद हरियाणा की आत्मा हैं। जब कवि, कलाकार और विद्यार्थी एक ही मंच पर आते हैं तो यह सुनिश्चित होता है कि उनकी कालजयी दृष्टि और कला आज की रचनात्मक दुनिया में फिर से जीवंत हो।
आयोजन में प्रतिष्ठित कलाकारों, गणमान्य अतिथियों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने मिलकर उस महान कवि को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी रचनात्मक छाया आज भी हरियाणवी सांस्कृतिक चेतना को दिशा देती है।
विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में लख्मीचंद के जीवन पर आधारित फीचर फिल्म दादा लख्मी का विशेष प्रदर्शन हुआ। डॉ. आर्य ने पंडित लख्मीचंद के परिवारजनों को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे जिनमें एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, पीसी मीणा (आईएएस), संभागीय आयुक्त, नरेंद्र बिजारणिया (आईपीएस), पुलिस अधीक्षक रोहतक शामिल रहे।
सुपवा में सांस्कृतिक आयोजन के दौरान रागनी प्रस्तुत करते पंडित विष्णु दत्त व टीम। स्रोत : सुपवा