साहित्यकार निर्मल वर्मा की कहानी पर आधारित हिंदी नाटक डेढ़ इंच ऊपर का मंचन करते कलाकार। स्रोत:
रोहतक। आप उसे घर कहते हैं, वह तो महज ईंट गारे का एक मकान है, जनाब। उसे घर बनाने का हुनर तो एक औरत में ही होता है। यह नाटक डेढ़ इंच ऊपर का सातवां मंचन दिल्ली के भव्य एंटरटेनमेंट स्टूडियो में जिले के हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (हिपा) की ओर से प्रस्तुत किया गया।
नाटक का निर्देशन रंगकर्मी विश्वदीपक त्रिखा ने किया जबकि अविनाश सैनी सहायक निर्देशक रहे। मनीष खरे ने सेट डिजाइन किया, वहीं संगीत व प्रकाश संयोजन जगदीप जुगनू का रहा। कार्यक्रम का समन्वय वरिष्ठ नकारावादक सुभाष नगाड़ा ने किया।
पुरुषों के जीवन में स्त्री का महत्व
यह नाटक जर्मनी में हिटलर के अत्याचारों के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है जो मानवीय संवेदनाओं, अकेलेपन, वैचारिक द्वंद्व और रिश्तों में पैदा होने वाले अविश्वास से उपजी निराशा को सहज ढंग से प्रस्तुत करता है। नाटक एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो बार में बैठा अजनबियों को अपनी जीवनगाथा सुनाता है।
उसकी पीड़ा का मूल उसकी दिवंगत पत्नी होती है। उसे लगता था कि वह अपनी पत्नी के बारे में सब कुछ जानता है, लेकिन उसकी पत्नी के हिटलर विरोधी क्रांतिकारी होने का रहस्य उसके लिए एक गहरा सदमा बन जाता है। नाटक पुरुषों के जीवन में स्त्री के महत्व को भी गहनता से रेखांकित करता है।