11-रोहतक के हुडा कॉम्प्लेक्स स्थित वैदिक भक्ति आश्रम में समर्पण न्यास की ओर से आयोजित संगोष्ठ
रोहतक। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानव दर्शन के पुरोधा थे। उनका मानना था कि विकास केवल भौतिक साधनों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि मानव के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलित विकास ही सच्ची प्रगति है।
एकात्म मानववाद सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के साथ अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर बल देता है। ये बातें बतौर मुख्य वक्ता समर्पण न्यास के प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल ने वैदिक भक्ति आश्रम में संगोष्ठी के दौरान कहीं।
हुडा कॉम्प्लेक्स स्थित वैदिक भक्ति आश्रम में समर्पण न्यास की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 58वीं पुण्यतिथि पर संगोष्ठी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व समर्पण न्यास के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, समर्पण न्यास के महासचिव अजय बंसल, अध्यक्ष डॉ. आरके चौधरी उपस्थित रहे। आरके चौधरी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला।
न्यास के महासचिव अजय बंसल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय चिंतन को आधार बनाकर ऐसा दर्शन दिया जिसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को एक जीवंत इकाई के रूप में देखा गया।
ज्ञानचंद गुप्ता ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन का अनुसरण करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर महापौर रामअवतार वाल्मीकि, सन्नी शर्मा, सौरव, शंकर गर्ग, नितिन जैन, रितेश गोयल, देवेंद्र गोयल, ऋषभ कुमार, शुभम व मनीष ठकराल उपस्थित रहे।