पत्रकारों वार्ता करते गौड़ ब्राह्मण शिक्षण संस्थान के पूर्व प्रधान रामकरण अत्री व अन्य लोग। अमर
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गौड़ संस्था के पूर्व प्रधान रामकरण अत्री ने कहा कि लीज की फीस समय पर जमा न होने के कारण गौड़ ब्राह्मण प्रचारिणी सभा को दी गई 123 कनाल जमीन का पट्टा रद्द नहीं किया जा सकता। क्योंकि 2009 में जब सरकार ने जमीन संस्था को दी गई थी तो उसके अंदर यह शर्त नहीं थी। अगर दूसरे कारणों से पट्टा रद्द किया गया है तो उससे समाज व गौड़ संस्था को अवगत कराया जाए। अत्री सोमवार को मैना रेस्टोरेंट में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
अत्री ने कहा कि 2009 में प्रदेश सरकार के हुडा विभाग ने सेक्टर 26 को विकसित करने के लिए पहरावर पंचायत की 64 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। उस जमीन में से गौड़ संस्था को 123 कनाल जमीन 33 साल के लिए पट्टे पर दी गई थी। तत्कालीन हुड्डा सरकार के कार्यकाल में उन्होंने 2007 से 2011 तक संस्था में 17 करोड़ के विकास कार्य करवाए। पहरावर गांव की पंचायत से जमीन संस्था को मिली। अब 30 जनवरी 2014 से अब तक संस्था पर सरकार ने प्रशासक लगा रखा है। मौजूद सरकार के कार्यकाल में आठ साल से संस्था का विकास ठप पड़ा है। कांग्रेस विधायक भारत भूषण बतरा दो बार विधानसभा में पहरावर गांव की पंचायत की जमीन का मुद्दा उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री से मांग है कि पहरावर की 123 कनाल जमीन गौड़ संस्था के पास ही रहनी चाहिए, ताकि संस्था आगे का भविष्य का प्लान तैयार कर सके। अगर सरकार ब्राह्मण समाज को उसकी जमीन नहीं देगी तो समाज के सांसदों व विधायकों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इस मौके पर एडवोकेट शिव कुमार शर्मा, राधेश्याम शर्मा पूर्व प्रधान गैर शिक्षक कर्मचारी संघ एमडीयू व मास्टर रामकुमार गौड़ भी मौजूद रहे।