जिंदल मॉडर्न स्कूल में 500 बेड का अस्थायी कोविड अस्पताल चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के नाम से संचालित होगा। अस्पताल में 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बेड तक ऑक्सीजन पाइप की टेस्टिंग का काम चल रहा है। रविवार शाम से इसे चालू करने की तैयारी है। इस अस्पताल के सभी बेड को जिंदल इंडस्ट्रीज स्थित ऑक्सीजन प्लांट से सीधे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाएगी।
जिंदल स्टेनलेस स्टील लिमिटेड (जेएसएल) के वाइस प्रेजिडेंट विजय बिंदलेश ने 500 बेड के अस्थायी अस्पताल के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिंदल स्कूल के परिसर को इसलिए चुना गया कि यहां से ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के लिए बेहद आसानी है। अगर यह अस्पताल किसी दूसरी जगह बना होता तो दस दिन का समय अधिक लगता। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन दो रूप में होती है। गैस के रूप में हमारे पास 270 एमटी (मीट्रिक टन) ऑक्सीजन है, जिसे सीधे मरीज को तो दिया जा सकता है, लेकिन उसे सिलिंडर में नहीं भरा जा सकता। सिंलिडर में भरने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए उसे लिक्विड फोरम में बदलना पड़ता है। ऐसे में अस्थायी अस्पताल को ऑक्सीजन प्लांट के समीप ही बनाने का फैसला लिया। ऑक्सीजन प्लांट से अस्थायी अस्पताल तक करीब डेढ़ किलोमीटर की पाइप लाइन बिछाई गई है। अस्पताल में लगे सभी बेड को प्रतिदिन 58 लाख लीटर (करीब आठ टन) ऑक्सीजन निशुल्क में सप्लाई की जाएगी। लिक्विड ऑक्सीजन को सिलिंडर के जरिये दूसरे स्थान पर उपलब्ध कराया जा सकेेगा।
चेयरमैन ने दिया था मुख्यमंत्री को प्रस्ताव
वाइस प्रेजिडेंट विजय बिंदलेश ने बताया कि जेएसएल के चेयरमैन रतन जिंदल व प्रबंधक निदेशक अभ्युदय जिंदल ने इस बारे में मुख्यमंत्री को खुद प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद उन्होंने यहां दौरा किया और यह अस्पताल रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो गया है।
270 टन ऑक्सीजन निशुल्क दे चुके
जेएसएल में 7 टन लिक्विड ऑक्सीजन व 220 टन गैस के रूप में ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। लिक्विड ऑक्सीजन के प्लांट का उत्पादन बढ़ाकर 9.5 टन कर दिया है। पिछले तीन माह में 75 से ज्यादा अस्पतालों को 270 टन ऑक्सीजन निशुल्क दी गई है। ओडिशा के प्लांट से भी 40 टन ऑक्सीजन निशुल्क दी जा रही है।
प्रशासन संभालेगा चिकित्सा प्रबंधन
अस्पताल में चिकित्सा प्रबंधन प्रशासन संभालेगा। डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट, असिस्टेंट, चतुर्थ श्रेणी कर्मी सहित अन्य लोगों की तैनाती जिला प्रशासन की ओर से की जाएगी। मरीजों को यहां भर्ती करना, मरीजों का उपचार सहित पूरी व्यवस्था प्रशासन के पास रहेगी। अस्पताल में सभी बेड ऑक्सीजन के होंगे। यहां वेंटिलेटर की व्यवस्था नहीं होगी। जरूरत पड़ी तो यहां पर वेंटिलेटर लगाए जा सकते हैं। तीन ब्लॉक में होगा अस्पताल
500 बेड के अस्पताल को तीन हिस्सों में बाटा गया है। जिसमें ब्लॉक ए, ब्लॉक बी टेंट में बनाए गए हैं। ब्लॉक सी कमरों में बनाया गया है। टेंट पूरी तरह से एयर कंडीशनर होंगे। मरीजों के तीमारदारों के ठहरने का अभी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। इसके लिए जिला प्रशासन अलग व्यवस्था देखेगा।
नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश
उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने शुक्रवार अस्थायी अस्पताल के संचालन को लेकर समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि 500 बेड के चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल में आवश्यक सेवाओं से जुड़े सभी विभागों का एक-एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाए, जिससे अस्पताल के सुचारु संचालन में कोई बाधा न आए।
दस मिनट में हो समाधान
डीसी ने अस्पताल के सफल संचालन के लिए बिजली, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता सहित अन्य सभी आवश्यक सेवाओं पर भी रिपोर्ट ली। उन्होंने संबंधित इंजीनियरिंग विभागों के कार्यालय अध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे अपने विभागों के एसडीओ स्तर के एक-एक अधिकारी की ड्यूटी रोस्टर बनाकर इस अस्पताल में लगाएं। व्यवधान आने की स्थिति में 10 मिनट के भीतर उसका समाधान किया जाए। डीसी ने उपकरणों, दवाओं, अन्य मेडिकल सामग्री व ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता तथा बायो-मेडिकल वेस्ट, किचन संचालन, स्टोर, वेयर हाउस, मरीजों का रजिस्ट्रेशन करने व उनका रिकॉर्ड रखने, मरीजों व उनके परिजनों की शिकायतों का समाधान करने, टेली कंसल्टेंसी, मेडिकल स्टाफ के रहने व खाने सहित अन्य प्रबंधों की समीक्षा की।