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मानसिक रोगियों को दाखिल करवाने के लिए कोर्ट को देने पड़ रहे आदेश

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नॉवेल कोरोना वायरस वुहान स्टेन कोविड -19 महामारी के खिलाफ पीजीआईएमएस रोहतक बतौर कोविड अस्पताल मरीजों को अपनी चिकित्सा सेवाएं दे रहा है। इसके विपरीत संस्थान का मनोचिकित्सा विभाग व प्रदेश का एकमात्र एसआईएमएच मानसिक रोगियों का उपचार करने से बच रहा है। स्थिति यह है कि इन रोगियों को दाखिल करवाने के लिए न्यायालय को आदेश देने पड़ रहे हैं। कोविड -19 के संक्रमण काल में मानसिक रोगियों को सबसे अधिक मुसीबत उठानी पड़ रही है। क्योंकि इनमें से कुछ मरीज लावारिस होते हैं और अपनी बीमारी, नाम व पता बताने में असक्षम होते हैं। यदि इन्हें उपचार के लिए पुलिस, सामाजिक संस्था पीजीआईएमएस लाती है तो इन्हें दाखिल करने से इनकार कर दिया जाता है। इसके अलावा किसी मानसिक रोगी को परिजन लेकर आते हैं तो उन्हें भी संस्थान मना कर देता है। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि चिकित्सक ही उपचार से मना करेगा तो मरीज कहां जाएगा। पीजीआईएमएस में मनोचिकित्सा विभाग की भारी भरकम टीम के साथ प्रदेश का एकमात्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ भी है। इसके बावजूद यहां मानसिक रोगियों के इलाज में कोताही बरती जा रही है।
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केस एक
एसीजेएम ईशा खत्री के समक्ष 21 अप्रैल को महिला थाने की ओर से केस फाइल किया गया। इसमें मानसिक रूप से बीमार महिला का उपचार कराए जाने के बारे में अपील की गई थी। पुलिस को ओर से बताया गया कि 20 अप्रैल को पीड़ित महिला महावीर पार्क में घूमती मिली, उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह पीजीआईएमएस में मरीज को लेकर गए, लेकिन डॉक्टर ने जांचने के बाद भी मरीज को दाखिल करने से इनकार कर दिया। मरीज को दाखिल न करने का कारण भी नहीं बताया। इस पर एसीजेएम ने सेक्शन 101 व 102 मेंटल हेल्थ एक्ट के तहत संस्थान को मरीज को भर्ती करने के निर्देश जारी किए हैं।
केस दो
एसीजेएम महम ने एक मामले में कहा कि मानसिक मरीज को लेकर पुलिस कोर्ट को अप्रोच कर रही है। आईओ के अनुसार मरीज की मानसिक स्थिति सही नहीं है। इस संबंध में 26 अप्रैल को पुलिस कैंप कार्यालय सब ज्यूडिशयल मजिस्ट्रेट व एरिया मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुई। इसमें बताया गया कि मरीज बोलेने में असमर्थ है। पुलिस कह रही है कि मरीज का मेडिकल टेस्ट हुआ और पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने मरीज को मानसिक रोगी भी बताया, लेकिन दाखिल करने से इनकार कर दिया। इसलिए सेक्शन 101 व 102 मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के तहत निर्देश जारी किए जाते हैं कि मरीज को एसआईएमएच में दस दिन एडमिट किया जाए और अस्पताल अथॉरिटी छह मई 2020 को अपनी इस संबंध में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को दे।
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केस तीन
27 अप्रैल को जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं कोविड- 19 के नोडल अधिकारी और अर्थ सेवियर फाउंडेशन ने पीजीआईएमएस पर मानसिक मरीजों के दाखिल न किए जाने पर सवाल उठाया है। इसमें लिखा गया है कि संस्थान में कुछ अज्ञात मरीजों को उपचार के लिए भेजा गया, जबकि उन्हें मना कर दिया गया। इनके साथ सहायक भी नहीं थे। जबकि ऐसे ही मरीजों के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ बनाया गया है। इस संबंध में संबंधित संस्थान को मरीज को भर्ती करने संबंधी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
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मरीज हमारे लिए वीवीआईपी हैं। यदि उसे दाखिल करने की जरूरत होगी तो हम करेंगे। किसी मरीज को मना नहीं किया जा रहा है।
- डॉ. राजीव गुप्ता, सीईओ एवं एचओडी मनोरोग विभाग
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