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20 साल से दोस्त हैं, दो साल पहले कहा था कुछ ठीक नहीं लग रहा किसी विद्वान को मेरी कुंडली दिखवा दे

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डॉ. राजेश बख्‍शी को मानव सेवा के लिए अभिनेता इरफान खान का दिया हुआ ब्लैंक चेक। - फोटो : RohtakCity
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रोहतक निवासी फिल्म निर्माता एवं अभिनेता डॉ. राजेश बख्शी ने अभिनेता इरफान खान के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके निधन से फिल्म जगत को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई शायद ही कभी हो पाएगी। उन्होंने कहा कि गत सप्ताह इरफान खान की मां का जयपुर में देहांत हुआ था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से वहां कोई नहीं पहुंच सका, स्वयं इरफान भी नहीं आए थे।
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डॉ. राजेश बख्शी ने बताया कि इरफान खान के साथ उनकी दोस्ती लगभग 20 वर्षों से है। हमारा अधिक समय मुंबई में एक साथ गुजरा। वो एक अच्छे अभिनेता के साथ - साथ बहुत ही रहम दिल इंसान थे। इरफान को मालूम था कि मैं लगभग 30 वर्षों से फिजियोथैरेपी व एक्यूप्रेशर द्वारा निशुल्क इलाज करता हूं। जो लोग बहुत गरीब हों कई बार उनके आने - जाने का किराया भी अपने पास से देता हूं। यह देखते हुए इरफान खान ने सन 2009 में एक दिन मुझे एक ब्लैंक चेक यह कहते हुए दिया कभी गरीबों की सेवा में मेरे पैसे भी इस्तेमाल कर लो। डॉ. राजेश ने बताया कि वो चेक आज भी मैंने लेमिनेशन करवाकर निशानी के तौर पर अपने पास रखा हुआ है। इसके अलावा लगभग दो साल पहले इरफान ने अपनी जन्म कुंडली देते हुए कहा कि मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा तू किसी विद्वान को मेरी कुंडली दिखाकर बता कि मेरे साथ क्या होने वाला है। इसके अलावा एक काम और करो कि नासिक के त्रंभकेश्वर मंदिर में मेरे काल सर्प दोष की पूजा करवा दे और एक पूजा मेरी हरिद्वार में करवा दे। अभिनेता डॉ. राजेश बख्शी ने अतिथि तुम कब जाओगे, आक्रोश, वीरे दी वेडिंग, जिला गाजियाबाद आदि प्रमुख फिल्मों में काम किया है।
पीयू के रंगमंच विभाग की सीढ़ियों पर हाय-हैलो से शुरू हुई थी हमारी दोस्ती
वरिष्ठ रंगकर्मी मोहन कांत ने इरफान खान के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उनके संग बिताए खास पलों को किया साझा
रोहतक। सन 1984 मैं पंजाब यूनिवर्सिटी के भारतीय रंगमंच डिपार्टमेंट ऑफ इंडियन थिएटर में एमए प्रथम वर्ष पूर्ण कर चुका था और द्वितीय वर्ष में जाने की तैयारी थी। एक रोज सुबह में जब मैं क्लास अटेंड करने के लिए डिपार्टमेंट गया तो सीढ़ियों पर इरफान खान मुझे बैठ मिले। हाय-हैलो हुई तो मैंने पूछा कैसे? उन्होंने जवाब दिया यहां डिपार्टमेंट में एडमिशन लेने के लिए आया हूं और आप के डायरेक्टर मोहन महर्षि से मिलना चाहता हूं। क्योंकि मोहन महर्षि साहब का ताल्लुक जयपुर से था। इसीलिए शायद कोई रिकमेंडेशन के साथ आए हुए थे। मैंने कहा मोहन महर्षि साहब तो यहां से ऑन डेपुटेशन दिल्ली एनएसडी के डायरेक्टर बन कर जा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने यहां एनएसडी में एडमिशन का इरादा बनाया। उस साल मैंने भी एनएसडी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया, लेकिन मेरा एडमिशन नहीं हुआ जबकि इरफान खान का एडमिशन हो गया था और यहीं से हमारी दोस्ती की शुरुआत हुई। यह कहना है एमडीयू एलुमिनाई और वरिष्ठ रंगकर्मी मोहन कांत का। उन्होंने अभिनेता के दुनिया से अलविदा कहने पर शोक जताया है।
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पृथ्वी थियेटर ने बढ़ाया मुलाकातों का सिलसिला
मैंने 1985 में अपनी एमए पूरी की और इधर इरफान ने 1987 में एनएसडी कंप्लीट किया। 1988 में बहुत सारे मित्रों ने मुंबई जाने का विचार बनाया, हालांकि हम सब अलग-अलग तरीके से मुंबई पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने पर हमारी मुलाकात अक्सर रोज शाम को पृथ्वी थियेटर में हुआ करती थी और मुंबई में स्ट्रगल के दिनों में अक्सर एक-दूसरे से किसी न किसी फिल्म या टीवी प्रोडक्शन के ऑफिस में मुलाकात होती रहती थी। मोहन कांत ने बताया कि इरफान की गाड़ी धारावाहिकों के माध्यम से चल पड़ी थी। टेलीविजन इंडस्ट्री के वह स्थापित कलाकार बन चुके थे। 1995 मैं इरफान खान के बेटे की जन्मदिन पार्टी में हमारी आखिरी मुलाकात हुई। बाद में मैं मुंबई छोड़ गुरुग्राम आ गया था।

अभिनेता इरफान खान के साथ अभिनेता डॉ. राजेश बख्शी। - फोटो : RohtakCity

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