एमडीयू में एडमिशन प्रक्रिया में एक और धांधली उजागर हुई है। पीजी में एडमिशन के लिए आनलाइन आवेदनों दो बार अपलोड किए गए। पहले अपलोड किए गए फार्म में वैटेज वाला कॉलम ही नहीं डाला गया।
जब सैकड़ों की तादाद में विद्यार्थियों ने आवेदन कर दिया तक इस फार्म को हटाकर वैजेट वाला कॉलम जोड़ कर फार्म अपलोड कर दिया गया।
यूनिवर्सिटी की इस लापरवाही के कारण सैकड़ों छात्र वैटेज के फायदे से वंचित रह गए। गलती सामने आने के बाद भी विवि प्रशासन इन विद्यार्थियों को कोई रियायत देने को तैयार नहीं है।
बुधवार को यूनिवर्सिटी में कुलपति के पास शिकायत लेकर पहुंचे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया कि एमडीयू प्रशासन की लापरवाही के कारण हजारों विद्यार्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक छात्रा प्रियंका के पिता कुलदीप ने बताया कि उनकी बेटी ने बीए अंग्रेजी ऑनर्स किया है। एमडीयू के तय मापदंडों के हिसाब से उसे दस अंक यूनिवर्सिटी से ही एफिलेटेड कॉलेज की छात्रा होने के दिए जाने थे और पांच अंक का वैटेज ऑनर्स का दिया जाना था। लेकिन आवेदन में यह कॉलम ही नहीं था, जिससे प्रियंका सहित अन्य सैकड़ों विद्यार्थी यह कॉलम भर ही नहीं पाए। लेकिन बाद में फार्म बदल दिया गया, जिससे दूसरे विद्यार्थियों को यह फायदा मिल गया और वे वैटेज के कारण मेरिट में ऊपर चले गए।
हर दिन आ रहे हैं विद्यार्थी शिकायत लेकर
एमडीयू प्रशासन ने विद्यार्थियों की समस्याओं को सुलझाने केलिए ग्रीवेेंस कमेटी का गठन किया है। इस तरह की समस्याओं का निपटारा करने के लिए बनाई गई कमेटी की डीन एकेडमिक अफेयर सुनिता मल्होत्रा को जिम्मेदारी दी गई है। बुधवार को शिकायत लेकर गए विद्यार्थी और अभिभावक पहले रजिस्ट्रार से मिले। रजिस्ट्रार एसपी वत्स ने शिकायत पत्र पर नोट लिख कर कमेटी को भेज दिया। इसके बाद डीन प्रोफेसर सुनिता मल्होेत्रा से मिले। बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच काफी बहस भी हुई और कमेटी के सदस्यों ने ही यह बात कही कि हर दिन इस तरह की समस्या लेकर विद्यार्थी आ रहे हैं। एक छात्रा के परिजनों ने बताया कि डीन ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि अब कुछ नहीं किया जा सकता है। एक छात्रा के मामा ने कहा कि दो दो फार्म यूनिवर्सिटी की ओर से अपलोड किए गए। या तो यह बात लिख कर दे दीजिये कि पहला फार्म यूनिवर्सिटी का था ही नहीं? इस पर कमेटी सदस्य कुछ बोल नहीं पाए और सिर्फ अपनी मजबूरी ही बताते रहे। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि सुबह दस बजे से यहां धक्के खा रहे हैं और शाम के छह बज गए, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकाला गया।
ये है वैटेज सिस्टम
दरसअल यूनिवर्सिटी ने हर श्रेणी के लिए अंकों का वैटेज देने की व्यवस्था की है। यदि विद्यार्थी एमडीयू के ही किसी एफिलेटैड कॉलेज का है तो उसे 10 अंकों का वैटेज दिया जाता है। एनएसएस के लिए पांच, ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी होने पर पांच, ऑनर्स विषय होने पर पांच सहित अन्य अलग अलग श्रेणियों के लिए वैटेज दिया जाता है। यह वैटेज मूल अंकों के साथ जोड़ कर मेरिट बनाई जाती है।
विद्यार्थी एसोसिएशन ने लगाया आरोप
अंबेडकर मिशनरीज विद्यार्थी एसोसिएशन के विक्रम डुमोलिया ने आरोप लगाया कि कुछ विद्यार्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ धोखा किया गया है। पहले जानबूझ कर बगैर वैटेज का फार्म अपलोड किया गया।
इनका कहना है
कुलपति इस वक्त बाहर हैं। इस मामले में उनसे चर्चा की जाएगी। विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। प्रोफेसर सुनीता मल्होत्रा, डीन एकेडमिक अफेयर, एमडीयू।