रोहतक। वेलेंटाइन डे ही नहीं सभी को हमेशा अपने व दूसरों के दिलों का ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि अहसास और भावनाएं हर व्यक्ति के दिल की सेहत से जुड़ी हैं। यदि दिल स्वस्थ है तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा और व्यक्ति बौद्धिक व शारीरिक रूप से मजबूत होगा। वेलेंटाइन डे मनाने का प्रचलन पश्चिमी देशों से आया है और वर्तमान में वहां हृदयाघात होने की औसतन उम्र 70 प्लस है, जबकि हमारे देश में यह 40 प्लस है। इसकी वजह दिल का टूटना नहीं, दिल का कमजोर होना है। हम अपने दिल की सेहत का ख्याल नहीं रखते।
पीजीआईएमएस में हजारों दिलों की बाईपास सर्जरी कर चुके वरिष्ठ कार्डिक सर्जन डॉ. एसएस लोहचब कहते हैं कि वेलेंटाइन डे का क्या इतिहास है, इससे मतलब नहीं है। जरूरी है कि दिल को खुश रखा जाए। प्र्र्र्रेम का संबंध मन से होता है, इसके लिए अहसास, संवेदनाओं का होना जरूरी है। मेडिकल साइंस की बात करें तो कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि व्यक्ति क्या सोचता है, वह कितना खुश है इसका असर उसके दिल पर पड़ता है। इसलिए कहा जा सकता है कि यदि कोई खुश है तो उसका दिल भी खुश है। खुश रहने वाले व्यक्ति का दिल भी स्वस्थ होता है और वह अन्य दिलों की तुलना में बेहतर कार्य करता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए कसरत, खान-पान जितना जरूरी है, उतना ही खुश रहना भी जरूरी है। हमारी जीवन शैली, सोच सभी दिल पर असर डालती हैं। वर्तमान में तनाव सबसे बड़ी समस्या है और लोगों की इच्छाएं बढ़ी हो गई हैं। यही वजह है कि दिल टूटते हैं और मेडिकल भाषा में लोग हृदय संबंधी रोगों के शिकार होते हैं।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों का दिल होता है कमजोर
समाज की जो भी अवधारणा हो, लेकिन मेडिकल साइंस मानता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों का दिल कमजोर होता है। पश्चिमी देशों में हृदयाघात होने की सामान्य आयु 65 से शुरू होती है, लेकिन हमारे देश में अधिक संवेदनशीलता होने के चलते यह 40 ही है। इसके अलावा मेडिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि 45 से 50 की आयु के बाद महिलाओं का मासिक धर्म आना बंद हो जाता है और वह भी पुरुषों के समान ही हृदयाघात का शिकार होने के समानांतर आ जाती हैं।
एक-दूसरे से मिलने का बहाना है वेलेंटाइन डे
पीजीआईएमएस के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव डोगरा बताते हैं कि एक-दूसरे से मिलने के लिए जैसे कई त्योहार मनाए जाते हैं, वैसे ही युवा वर्ग वेलेंटाइन डे मनाता है। हकीकत में तो किसी को इस दिन के इतिहास का पता ही नहीं होगा। यदि इसका कोई इतिहास जानेगा तो शायद इस दिन को मनाने से युवा पीछे हटेंगे। लेकिन बाजार ने इस दिन को युवाओं के जेहन में अलग ढंग से पेश किया है। बाजार का काम लोगों की भावनाओं को कैश करना है। यही वजह है कि पहले सात दिन का वेलेंटाइन डे होता था। अब नई परंपरा आ रही है इसमें वेलेंटाइन डे के अगले दिन स्लैप डे, किक डे, परफ्यूम डे, फ्लर्टिंग डे, कंफेशन डे, मिसिंग डे और ब्रेकअप डे तक का ग्राउंड तैयार हो गया है। इसके लिए भी बाजार में ग्रीटिंग व अन्य चीजें आ जाएंगी।