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पीजीआईएमएस में 2017 से गायब जांच फाइल की डुपलीकेट कॉपी पर एक्शन

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रोहतक। अप्रैल 2017 में पीजीआईएमएस से गायब हुई फर्जीवाडे़ की एक जांच फाइल पर प्रशासन अब कार्रवाई करने की तैयारी में है। अधिकारियों ने फाइल की डुपलीकेट कापी मंगा कर कार्रवाई के लिए चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिख दिया है। इसमें अधिकारी को संबंधित व्यक्तियों को कार्रवाई से पहले जवाब मांगने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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पीजीआईएमएस में एक नर्सिंग स्टाफ को एमएससी नर्सिंग की सीट फर्जीवाडे़ से देेने के मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद फाइल कुलपति के पास पहुंची और कार्रवाई के निर्देश जारी होने के बाद यह निदेशक कार्यालय से फाइल ही गायब हो गई थी। इस मामले की शिकायत सीएम विंडो से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक की गई।
गौरतलब है कि अगस्त 2016 में हुए फर्जीवाडे़ की जांच 2017 तक चली और अप्रैल 2017 से यह फाइल निदेशक कार्यालय से गायब हो गई। इसमें एक नर्सिंग सिस्टर पर आरोप है कि उसने अधिकारियों से मिलीभगत कर एमएससी नर्सिंग के कोर्स के लिए सीट ली, लेकिन काउंसिलिंग के दौरान वह पकड़ी गई। अगस्त 2016 में एमएससी नर्सिंग की सीट अलाटमेंट में संस्थान की नर्सिंग सिस्टर ने नौकरी पर रहते हुए खुद को सर्विस में नहीं दिखाया, ताकि वह बांड भरने से बच सके। पहले नर्सिंग सिस्टर के आवेदन को एमएस कार्यालय ने मंजूर कर दिया और नर्स ने लिखित परीक्षा भी पास कर ली। जब वह काउंसिलिंग में गई तो नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल ने नर्स को पहचान लिया। इस पर जांच के लिए एमएस कार्यालय शिकायत भेजी गई तो चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय की ओर से लीगल ओपिनियन कराया गया। जांच में सामने आया कि इस पर पहले भी आब्जेक्शन लगाया जा चुका है। इस गलती का जिम्मेदार लिपिक को ठहराया जाता है। इसके बाद तत्कालीन चीफ विजिलेंस अधिकारी डॉ. आरबी सिंह जांच करते हैं। अधिकारी ने अपनी जांच में बताया कि लिपिक ने अपने कहीं भी हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया, यहां तक कि जब महिला लिपिक के हस्ताक्षर दिखाए गए हैं वह वहां ड्यूटी पर ही नहीं थी।
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संबंधित स्टाफ से मांगेंगे जवाब
यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। गुम फाइल की कापी मंगा कर एमएस को भेजी गई है। वह संबंधित स्टाफ से इस पर जवाब मांगेंगे। इसके बाद जो भी सामने आएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
स्टाफ पर कार्रवाई का अधिकार एमएस को जबकि फैकेल्टी पर निदेशक का
सूत्रों का कहना है कि पीजीआईएमएस में किसी स्टाफ पर कार्रवाई करने का अधिकार एमएस के पास होता है। लेकिन किसी फैकेल्टी पर कार्रवाई का अधिकार निदेशक के पास होता है। इस मामले में माना जा रहा है कि जांच फाइल को फिर घुमाने के लिए एमएस कार्यालय भेज दिया गया है।
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