किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अधिकारी उन्हें परंपरागत फसलों के बजाय नकदी फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें परंपरागत फसलों से प्राप्त आय व नकदी फसलों से प्राप्त आय के बारे में विस्तार से समझाएं। किसानों के भ्रमण कराए जाएं। इससे वे प्रगतिशील किसानों की आधुनिक खेती को समझ सकेंगे व खेती में प्रयोग की जा रही उन्नत तकनीक को जान सकेंगे। यह कहना है उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार का। वे मंगलवार को अपने कैंप कार्यालय में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही आत्मा योजना की समीक्षा के लिए आयोजित गवर्निंग बोर्ड की बैठक में बोल रहे थे।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने विभाग के अधिकारियों से इस योजना के तहत विभिन्न मदों में प्राप्त बजट व इस बजट के उपयोग की जानकारी ली। उन्हें टेक्नोलॉजी रिफाइनमेंट रोड मैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों की उन्नत किस्मों व आधुनिक तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए किसान मेले आयोजित किए जाएं। किसानों को ऐसी जगहों का भ्रमण कराया जाए, जहां किसान नकदी फसलों या फसलों के विविधीकरण से परंपरागत खेती के बजाय अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। किसान परंपरागत खेती के तहत गेहूं व धान के फसल चक्र को अपना रहे हैं। इससे इन उत्पादों का उत्पादन खपत से ज्यादा हो रहा है। किसान इन फसलों की अपेक्षा फल सब्जी व अन्य नकदी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। किसानों को सब्जी, फल का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करें। दलहन फसलों के साथ सब्जी की विभिन्न फसलें लेकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। किसान सूरजमुखी, गेंदा, अरंडी की खेती से भी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इस मौके पर कृषि उपनिदेशक डॉ. रोहताश सिंह, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. हवा सिंह, एसडीओ राजबीर सिंह, डॉ. रामकरण, सहायक सांख्यिकी अधिकारी विनोद हुड्डा, इफको के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह, राकेश कुमार, किसान जय कुमार समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।