सब्जी मंडी से बाहर निकलते ही सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। सब्जी मंडी से चंद कदमों की दूसरी से भाव बढ़ते-बढ़ते मार्केट और मार्केट से सेक्टरों तक पहुंचते-पहुंचते दाम तीन गुना हो जाते हैं। महंगाई की मार ऐसी पड़ रही है कि रसोई का जायजा ही बिगड़ गया है। सब्जियों के इस तरह बढ़ रहे दामों से अधिकारी अनभिज्ञ नहीं है। लेकिन एसडीएम को संबंधित मामले में शिकायत का इंतजार है। एसडीएम का कहना है कि शिकायत मिलने पर ही वह कुछ कर पाएंगे। उधर, मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि बाजार में बढ़े मनमाफिक सब्जियों के दामों को रोकने का कोई प्रावधान मार्केटिंग बोर्ड के पास नहीं है।
बता दें कि हर बार सर्दियों में सब्जियों के दाम कम होते हैं, वहीं इस बार लगातार सब्जियों के भावों में तेजी बरकरार है। उदाहरण के लिए मंडी में किसानों की गाजर थोक में 12 से 15 रुपये किलो तक बिक रही है, जो फड़ी वालों के पास 25 से तीस रुपये किलो और सेक्टर की मार्केट तक पहुंचते-पहुंचते 40 रुपये किलो तक पहुंच रही है। इसी प्रकार हर सब्जी के दाम किसान के पास से निकलते ही बढ़ने लगते हैं। वहीं अधिकारियों का इस पर कहना है कि वह सेक्टर की मार्केट पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। अगर कोई किसी प्रकार का भंडारण करता है या कालाबजारी करता है तो उस पर वह कार्रवाई कर सकते हैं। सब्जी मंडी के खुदरा रेट और फिर मार्केट रेट का जायजा लिया तो दामों में चौंकाने वाले अंतर सामने आए। रोहतक मंडी में स्थानीय किसानों के साथ-साथ अन्य प्रदेशों से सब्जियां खरीद कर लाई जाती है। कुछ सीजन की सब्जियां स्थानीय किसान बेचते हैं। जिसे विभिन्न फड़ी वाले, रेहड़ी वाले व मार्केट के दुकानदार खरीदते हैं। सब्जी मंडी से बाजार तक पहुंचते-पहुंचते दामों में काफी उछाल आ जाता है और इसका असर सीधे तौर पर आमजन की जेब पर पड़ता है।
मार्केट कमेटी की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि दुकानदार को अपना रेट लेने से रोक सके। मार्केटिंग बोर्ड सब्जियों का रेट तय नहीं करती। सेक्टर की मार्केट में कोई ले जाकर सब्जियां बेचता है उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। सब्जियों के दामों को लेकर दुकानदारों पर कोई दबाव नहीं डाल सकते। हमें स्टॉक जांचने और कालाबाजारी रोकने का अधिकार है। कोई भी ओवर स्टॉक करता है तो हम उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। अगर किसान ने भावांतर योजना के तहत पंज
- दीपक लोहचब, मार्केट कमेटी सचिव, रोहतक।
इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। रहा सवाल सब्जी महंगी बेचने का तो स्थान के हिसाब से रेट में अंतर होता है। यदि कही पर सब्जियों का भंडारण किया जाता है तो उसके खिलाफ एक्ट के हिसाब से कार्रवाई की जाती है।
- राकेश कुमार, एसडीएम।