रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने चिकित्सा और तकनीकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 30 जनवरी को एमडीयू के कंप्यूटर साइंस और एप्लीकेशन विभाग के शोध दल के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कोविड-ईटी तकनीक का पेटेंट किया गया है।
इस तकनीक से निमोनिया सहित फेफड़े से जुड़ी गंभीर बीमारियों की पहचान 3-5 सेकेंड में हो जाएगी। शोधार्थी छाया गुप्ता ने बताया कि आज भी अधिकांश गंभीर बीमारियां फेफड़ों से जुड़ी होती हैं। परीक्षण में समय लगता है। कई बार रिपोर्ट भी गलत आती है। कोविड काल के दौरान लोग घंटों लाइन में खड़े होकर टेस्ट कराते थे। रिपोर्ट आने में दो-दो दिन लग जाते थे। इसी अनुभव से कोविड-ईटी मॉडल की नींव रखी गई।
छाया ने बताया कि इस प्रणाली की सटीकता लगभग 99 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों व सीमित संसाधनों वाले अस्पतालों के लिए भी तकनीक उपयोगी साबित होगी। यह एक वेब एप्लीकेशन आधारित मॉडल है जिसमें केवल एक्स-रे इमेज अपलोड करनी होती है और एआई सिस्टम बीमारी की पहचान कर लेता है। यह पेटेंट शोधार्थी छाया गुप्ता, प्रो. नसीब सिंह गिल और प्रो. प्रीति गुलिया को प्रदान किया गया है।
इंसेट
कैसे काम करता है एआई मॉडल
एआई मॉडल वेब एप्लीकेशन आधारित है। सरल प्रक्रिया से काम करता है। सबसे पहले मरीज के छाती का एक्स-रे किया जाता है। इसके बाद एक्स-रे इमेज को वेब एप्लीकेशन पर अपलोड किया जाता है। एआई आधारित सिस्टम इमेज का विश्लेषण करता है और कुछ ही मिनटों में कोविड, निमोनिया या फेफड़े के संक्रमण की पहचान कर स्क्रीन पर रिपोर्ट प्रदर्शित कर देता है।