नारनौल। दिव्यांगजनों के लिए विशेष शिक्षा की स्थिति आज भी गंभीर बनी हुई है। कई स्कूलों में दिव्यांग छात्रों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जहां सुविधाएं हैं, वहां भी योग्य विशेष शिक्षकों की कमी है। इस समस्या के समाधान के लिए संतोष मेमोरियल दिव्यांगजन एवं पुनर्वास केंद्र के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कई वर्षों से कार्य किया है।
इस क्षेत्र में संसाधनों की कमी के कारण आरसीआई को सुधार की दिशा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं भारत सरकार ने होम बेस्ड एजुकेशन की पहल की है, लेकिन अब यह स्पष्ट रूप से महसूस हो रहा है कि दिव्यांग बच्चों के लिए एक सशक्त और समावेशी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है।
दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष शैक्षिक सामग्रियां जैसे साइन लैंग्वेज और व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम की आवश्यकता है, लेकिन अधिकांश स्कूलों में इन सुविधाओं का अभाव है। इस कमी के कारण, दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा का स्तर और उनके समग्र विकास की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
अब देश में भी एक ओपन स्कूल बोर्ड स्थापित किया जाए, जिसमें दिव्यांग बच्चों को उनकी विशेष जरूरतों के अनुसार शिक्षा, प्रशिक्षण और विकास के अवसर मिलें। इस कदम से न केवल दिव्यांगजन का जीवन और अधिक सुगम व सशक्त होगा, बल्कि वे समाज में अपने योगदान को भी बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकेंगे।