न मोर्चा और न ही संतरी, फिर किसके भरोसे है रोहतक रेलवे जंक्शन के दो सुरक्षा बलों का भारी भरकम असलहा? ये सवाल करीब एक माह पहले पंजाब के दीनानगर थाने में हुई आतंकी वारदात के बाद उठ रहे हैं। रोहतक जंक्शन पर रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस स्वयं चेक पोस्ट और बूथ के अभाव में असुरक्षित दिख रही है।
पंजाब में आतंकी हमले के बाद हरियाणा में हाई अलर्ट घोषित किया गया था, लेकिन संवेदनशील माने जाने वाले रोहतक जंक्शन पर इस वारदात से अभी तक कोई सबक नहीं लिया। न ही यहां अलर्ट जैसा कोई नजारा कभी देखने को मिला। उल्लेखनीय है कि रोहतक जंक्शन पर स्थित आरपीएफ और जीआरपी के थानों में भारीभरकम असलहा (संवेदनशील हथियार) भरा पड़ा है।
हालांकि थाने में असलाह रखने के लिए माकूल व्यवस्था की गई है। बावजूद इसके स्वयं जीआरपी और आरपीएफ का स्टाफ भी इस बात को स्वीकार करता है कि अगर दीनानगर थाने जैसी विपरीत स्थिति उत्पन्न होती है तो भीतर बैठी पुलिस अचानक आपरेशन करने में विफल ही रहेगी और इन हालात में भारी भरकम क्षति के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा।
इसलिए बज रही है खतरे की घंटी
1- रेलवे स्टेशन पर अभी तक सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं।
2- थानों के अलावा एक भी पुलिस पोस्ट नहीं है।
3- चौतरफा चोर रास्तों की भरमार है।
4- किसी भी वारदात के बाद गोदाम रोड गेट का इस्तेमाल आसानी से हो सकता है।
5- पूरे स्टेशन पर एक टीटी है।
जो पुलिस बूथ नहीं खुलने दे रहे वो मोर्चा कैसे बनवाएंगे
राजकीय रेलवे पुलिस रोहतक के प्रभारी सुखबीर सिंह ने रेलवे प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने माना कि विपरीत परिस्थितियों में रोहतक जंक्शन एकदम असुरक्षित है। साथ की बोले, जो सुरक्षा के लिए बनाए गए पुलिस बूथ पर ताला जड़ चुके हों, अंदाजा लगा सकते हैं कि वो हथियार से लैस संतरी के लिए मोर्चा कैसे बनवाएंगे। स्टेशन पर सुरक्षा की दृष्टि से हर प्लेटफार्म के दोनों छोर पर आरपीएफ और जीआरपी के पुलिस बूथ होने चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में फायरिंग के दौरान मोर्चा संभाला जा सके।
यहां 100 से अधिक की स्पीड से दौड़ सकते हैं...
आरपीएफ इंस्पेक्टर एवं थाना प्रभारी एसपी सिंह ने स्वीकार किया कि रोहतक जंक्शन पर बेसिक सिक्योरिटी तक नहीं है। चारों ओर के रास्ते खुले हैं। सिर्फ एक टीटी सभी गेट पर चेकिंग करेगा? ये भी भली प्रकार समझा जा सकता है। गोदाम रोड गेट को बंद करने के लिए कई बार कहा जा चुका है, लेकिन गेट खुला है। बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले 100 से अधिक की स्पीड से भागने में इस रोड का आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
आरपीएफ में 26 का स्टाफ, एरिया 200 किलोमीटर
आरपीएफ के जिस थाने में भारी संख्या में हथियार भरे पड़े हैं, वहां महज 26 लोगों का स्टाफ है। चौंकाने वाली बात ये है कि रेलवे सुरक्षा बल के इन 26 लोगों के स्टाफ के कंधों पर 200 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का जिम्मा है। इसमें पानीपत आउटर, रेवाड़ी आउटर, जुलाना, बहादुरगढ़ आउटर तक सुरक्षा के लिए महज एक इंस्पेक्टर, एक एसआई, 13 हवलदार और नौ सिपाही शामिल हैं। रुटीन में इनमें से किसी न किसी की छुट्टी, कोर्ट संबंधी काम, सरकारी कामकाज और घटनाक्रमों और गश्त के लिए रवानगी रहती है।