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किसी के पास काम है न खाने का दाना, अब घर चले जाना ही बेहतर

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No one has work or food grains, now it's better to go home - फोटो : RohtakCity
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गर्म हवा के थपेड़े। 45 डिग्री तापमान। खाने को कुछ है न पीने को पानी। पसीने से तरबतर बच्चे। मां किसी तरह बच्चों को सुलाने का प्रयास कर रही है तो पिता साथ में गुमसुम बैठा है। यह सब देखने को मिला रविवार दोपहर को शहर के पुराने बस अड्डे पर। यहां एक प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ बंद पड़ी दुकान की शेड के नीचे बैठा था। पास में पीपल के पेड़ के नीचे कुछ और प्रवासी मजदूर बैठे थे। इन सभी को अपने घर जाना है। परिवहन के साधन बंद होने के कारण वे परेशान हैं। प्रशासन के पास 20 दिन पहले पंजीकरण कराने के बावजूद अब तक उनके घर जाने की बारी नहीं आई है। अमर उजाला ने बात की तो मजदूरों का दर्द बाहर आया।
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भागलपुर निवासी रामवचन ने बताया कि वह अपनी पत्नी रूबी, 13 वर्षीय बेटी पूजा, नौ वर्षीय बेटा गौतम, सात वर्षीय बेटा छोटू के साथ सैनिक कॉलोनी में रह रहा था। यहीं उसका भाई संजीत कुमार, उसकी पत्नी प्रियंका अपने चार माह के बेटे सोनू के साथ रह रहे थे। उसका साला मनोज, पत्नी पार्वती, बेटी आरती, विद्या व शिवानी के साथ रहता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया है। इस कारण सब बेकार हो गए हैं। किसी के पास काम है न खाने का दाना। पास के आश्रम से पहले खाना ले आते थे। अब तो वह भी बंद हो गया है। इसलिए रविवार को किराये का घर खाली कर शहर थाना पहुंचे। यहां से लोगों को ट्रेन के जरिये घर पहुंचाया गया है। घर जाने के लिए हमने भी पंजीकरण कराया है। इसे 20 दिन हो गए। अब तक कोई जवाब नहीं आया है। हम जाकर पता करते हैं तो बाद में आने या फोन आने के बाद बुलाने की बात कह कर वापस भेज देते हैं। शनिवार को भी थाने आए थे। यहां से हमें डांट कर भगा दिया। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस कर्मचारी को बताया भी कि हमें फोन आया था। इसके बावजूद हम ट्रेन में नहीं बैठ पाए। अब सुबह यहां बैठे हैं। दिन भर से कुछ नहीं खाया है। आसपास पानी भी नहीं है। पानी मिला भी तो गर्म उबलता हुआ। इसे पी भी नहीं पाए। इधर, अनंत, श्रीराम व अन्य बताया कि हम 36 लोग हैं। कुछ सैनिक कॉलोनी तो कुछ मायना से पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं। गर्मी में भूख-प्यास से परेशान होकर घर जाने के लिए निकलने हैं। प्रशासन मदद कर दे तो बस या ट्रेन से अपने घर पहुंच जाएंगे। यहां भूखे-प्यासे ही मर जाएंगे। अपनी परेशानी लेकर उपायुक्त कार्यालय भी गए थे। यहां रविवार के कारण अधिकारी नहीं मिले। कर्मचारी ने अवकाश होने की बात कह कर लौटा दिया।
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