एक बच्ची ने पहलवान बनने का सपना संजोया, लेकिन 13 साल की उम्र में उसकी शादी कर दी गई।
14 की उम्र में जुड़वा बच्चों की मां भी बनी, लेकिन सपना नहीं टूटा। पुरानी जिंदगी को भुलाकर वह 2011 में अखाड़े में उतरी। आज 21 साल की उम्र में वह नेशनल स्तर की महिला पहलवान है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों का अंबार लगा दिया। परिवार चलाने के लिए घर में सिलाई करती है। ओलंपिक की तैयारी के लिए रोजाना प्रैक्टिस को घर से 40 किलोमीटर दूर आती है।
यह कहानी है भिवानी में जन्म लेने वाली नीतू की। बचपन में परिवार वालों ने हमेशा अखाड़े में जाने का विरोध किया और 13 साल की उम्र में भिवानी में ही अधेड़ से शादी कर दी। यहां से एक माह बाद ही नीतू मायके आ गई और उसी साल रोहतक जिले के महम ब्लॉक के बेड़वा में संजय कुमार के साथ दूसरी शादी हो गई। 14 साल की उम्र में जुड़वां बच्चों की मां बनने के साथ ही उसका पहलवान बनने का सपना पूरी तरह से खत्म होता दिखने लगा। 2011 में अपने पति संजय को पहलवान बनने के सपने के बारे में बताया। संजय ने साथ दिया और रोजाना भिवानी के अखाड़े में जाना शुरू कर दिया। वहां लड़कों के अखाड़े में प्रैक्टिस करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। बाद में रोहतक के छोटूराम स्टेडियम में प्रैक्टिस करने लगी। नीतू ने स्टेट स्तर पर दर्जनों गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज जीते और अब उसके कदम नेशनल व इंटरनेशनल की ओर चल निकले हैं। नवंबर 2014 में नेशनल सीनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रांज जीता तो अप्रैल 2015 में जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर। जनवरी 2015 में नेशनल गेम्स में भी नीतू ने कांस्य पदक झटका। ब्राजील में अगस्त 2015 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में नीतू की भागीदारी रही। सपना ओलंपिक खेलने का। नीतू कहती हैं कि अगर जज्बा व हिम्मत रहती है तो इंसान जिंदगी में कुछ भी कर सकता है। अगर जिंदगी के उतार-चढ़ाव में टूट जाती तो आज यहां तक नहीं पहुंचती।
ओलंपिक के सपने की सुबह 3 बजे शुरुआत, रोजाना 200 किलोमीटर
नीतू का दिन रोजाना 3 बजे शुरू हो जाता है। पति संजय उसे लगभग 3.30 बजे महम बस अड्डे पर छोड़ने के लिए चलते हैं। यहां से नीतू 4 बजे वाली बस में बैठकर लगभग सवा 5 बजे सर छोटूराम स्टेडियम में पहुंच जाती है। वहां दो से तीन घंटे प्रैक्टिस करने के बाद वापस घर पहुंचती है। घर के कामकाज के बीच समय निकालकर पैसों के लिए कपड़ों की सिलाई करती है। सिलाई करके कुछ अपनी प्रैक्टिस पर खर्च करती है तो बाकी से परिवार को दो वक्त की रोटी मिल जाती है। अगर सिलाई का काम नहीं होता है तो बच्चे प्रिंस और आयुष के साथ समय बिताती है। दोपहर बाद 3 बजे फिर से सर छोटूराम स्टेडियम के लिए निकलती है और रात 10 बजे तक घर पहुंचती है। पहलवान रोजाना 200 किमी की दूरी तय करके प्रैक्टिस करने आती है।
पति निभा रहे पूरा साथ
नीतू के लिए सबसे सुकून वाली बात यह है कि उसके पति संजय पूरा साथ निभा रहे हैं। नीतू को रोजाना महम से गांव बेड़वा तक 20 किलोमीटर लाने ले जाने की जिम्मेदारी संजय की ही है। संजय कहते हैं कि मेरी पत्नी अगर सपना पूरा करना चाहती है तो मैं हर संभव साथ देता हूं।
नेशनल गेम्स की तैयारी
खिलाड़ी फिलहाल नेशनल गेम्स की तैयारी कर रही है। उसे ओलंपिक तक पहुंचने के लिए सभी चैंपियनशिप में जीत दर्ज करनी होगी। दिसंबर में नेशनल गेम्स हो सकते हैं। वह 53 किग्रा भार वर्ग में खेलती है और अपना भार बढ़ने नहीं देना चाहती। इसके लिए खूब पसीना भी बहा रही है। गरीबी उसकी राह में रोड़ा बन सकती है, लेकिन नीतू कहती हैं कि मैं उससे भी जूझने की हिम्मत रखती हूं।