देश के महानगरों के साथ एनसीआर क्षेत्र में लागू नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल एक्ट 2010 की मार अकेले रोहतक पर ही गिरती नजर आ रही है।
10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को लेकर अभी दिल्ली में तो मामला साफ भी नहीं हो सका है, लेकिन इससे पहले ही रोहतक में नए नियम को लागू कर दिया गया है।
जिले में डीजल कारों को केवल 10 साल के लिए ही मान्यता दी जा रही है। यानी कि रोहतक में डीजल कारों की आरसी ही 15 साल की बजाए दस साल के लिए बनाई जा रही है।
जबकि वन टाइम फीस की एवज में रजिस्ट्रेशन कराने वालों को पूरी फीस अदा करनी पड़ रही है। हैरानी की बात है कि साथ लगते एनसीआर में पड़ने वाले प्रदेश के दूसरे जिलों में अभी 15 साल की ही आरसी बनाई जा रही है।
जिले के वाहन पंजीकरण कार्यालय में प्रतिमाह डीजल की करीब 2000 गाड़ियों का पंजीकरण होता है। अब जिले में डीजल कार 15 साल की बजाए दस साल के लिए मान्य है।
यह एनजीटी एक्ट-2010 के तहत उठाया जाने वाला कदम बताया जा रहा है। लेकिन वाहन पंजीकरण कराने वालों की आपत्ति है कि रोड टेक्स तो 15 साल के हिसाब से लिया जा रहा है और वैद्यता केवल दस साल के लिए।
यदि कोई नियम है तो वह सोनीपत और चंडीगढ़ में भी लागू होना चाहिए। लेकिन वहां वाहन 15 साल के लिए ही पंजीकृत हो रहे हैं। यदि दस साल की ही वैद्यता देनी है तो फीस में भी कटौती होनी चाहिए।
बोले अधिकारी
एनजीटी एक्ट 2010 के तहत दस साल के लिए ही डीजल कार का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। फीस वन टाइम ली जाती है, इसके लिए शीर्ष अधिकारियों से निर्देश जारी हैं। अब सोनीपत व अन्य किसी एनसीआर क्षेत्र में 15 साल के लिए आरसी कैसे बनाई जा रही है, इस संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता। रोहतक में मेरे आने से पहले ही यह नियम लागू है।
- दलबीर फौगाट, एसडीएम, रोहतक।
यूं समझे गणित को
स्थान डीजल गाड़ी की कीमत वन टाइम रोड टेक्स समय
रोहतक 9,75,000 78,162 10 साल
सोनीपत 6,00,000 29,000 15 साल
चंडीगढ़ 24,00,000 2,40,000 15 साल