पीजीआई में नवजात की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वार्ड दो में बुधवार सुबह हंगामा हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि गर्भवती दर्द से कराहती रही और डॉक्टर कान बंद करे बैठे रहे। गुहार नहीं सुने जाने पर बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सा अधीक्षक, निदेशक, पीजीआई थाने में शिकायत दी है। नवजात के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को जांच का आश्वासन दिया है। जांच गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा को सौंपी गई है।
इससे पहले, बुधवार सुबह झज्जर के गांव सिवाना निवासी संदीप व उसके परिजनों ने नवजात की मौत पर हंगामा कर दिया। वार्ड दो के डॉक्टरों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घटना के लिए प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। संदीप ने बताया कि मैं पत्नी मोहिनी को 12 अक्तूबर को पीजीआई में लाया था। मुझे कहा गया कि 14 अक्तूबर को उसे लेकर आए। फिर उसकी अल्ट्रासाउंड जांच कराएंगे, जबकि मोहिनी की तबीयत खराब थी। 13 अक्तूबर की रात को दर्द बढ़ गया तो मोहिनी को लेकर पीजीआई आए।
सुबह पांच बजे बताया गया कि लड़का मरा पैदा हुआ है। जबकि हमें अंदर तक नहीं ले जाया गया। झज्जर से रेफर होकर आने पर भी पीजीआई के डॉक्टर ने मरीज को गंभीरता से नहीं लिया। दो घंटे हंगामा करने के बाद परिजन साढ़े ग्यारह बजे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक चौहान से मिले। चिकित्सा अधीक्षक को मृतक के दादा बलराज सिंह ने बताया कि मोहनी प्रसव पीड़ा से परेशान थी, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी संभाल नहीं की।
बोले अधिकारी
बच्चा गर्भ में उल्टा था और उसका जन्म समय से पहले हुआ था। परिजनों द्वारा डॉक्टरों की लापरवाही के आरोप पर शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है। मामले की जांच गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिति नंदा करेंगी।
- डॉ. अशोक चौहान, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस
इस मामले की जांच पहले पीजीआई के डॉक्टर करेंगे। इसके बाद पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार अगली कार्रवाई तय होगी।
- कुलदीप, एसएचओ, पीजीआईएमएस थाना।