रोहतक स्थित किला रोड बाजार में राखी देखता एक परिवार। संवाद
- फोटो : जितेंद्र लोधी।
रोहतक। रेशम के धागों से बंधा रक्षाबंधन का त्योहार इस बार भी डिजिटल दुनिया की वर्चुअल राखियों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। बहनें अब भी वाट्सएप, फेसबुक, स्काइप और टेलीग्राम जैसे सोशल प्लेटफॉर्म की बजाय डाक के माध्यम से अपने भाइयों की कलाइयों को सजाने के लिए रंग-बिरंगी राखियां भेजना ज्यादा पसंद कर रही हैं।
डाक विभाग ने बहनों के प्यार को भाइयों तक पहुंचाने के लिए रक्षाबंधन पर विशेष तैयारियां की हैं। पोस्टमास्टर अशोक वर्मा ने बताया कि राखी भेजने के लिए बुकिंग पिछले महीने से शुरू हो चुकी हैं और अब तक 295 राखियां विदेशों में भेजी जा चुकी हैं, जिससे लगभग साढ़े चार लाख रुपये की बुकिंग राशि एकत्रित हुई है। डाक वितरण के लिए रक्षाबंधन के दिन भी विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि कोई भाई राखी से वंचित न रहे।
विदेशों में बसे भारतीयों में भी इस पर्व का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। रोहतक से अमेरिका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में बड़ी संख्या में राखियां स्पीड पोस्ट और रजिस्टर्ड डाक के जरिए भेजी जा रही हैं।
इसके साथ ही सीमाओं पर तैनात फौजी भाइयों को भी बहनों के प्यार की डोर पहुंच रही है। डाक विभाग से अरुणाचल प्रदेश, लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी स्पीड पोस्ट से राखियां भेजी गई हैं।
डाक विभाग की यह सेवा यह साबित कर रही है कि तकनीक चाहे कितनी भी आगे बढ़ जाए, भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और परंपराओं का स्थान आज भी सबसे ऊपर है।