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नवरात्र : हाथी पर सवार होकर मां दुर्गा आएंगी, सुख-समृद्धि लाएंगी

Sun, 23 Mar 2025 01:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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रोहतक। इस वर्ष आज से सात दिन बाद चैत्र नवरात्र की 30 मार्च से शुरुआत हो रही है। कलश स्थापना के साथ ही व्रत प्रारंभ हो जाएंगे। चैत्र नवरात्र के पहले दिन से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। इससे जगत में सुख-समृद्धि आएगी। इस बार चैत्र नवरात्र 9 नहीं, बल्कि 8 दिन के होंगे। यानी कि नवमी इस बार 6 अप्रैल को होगी।
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हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र की पूजा का विशेष महत्व है। व्रती पूरे नवरात्र मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। इस दौरान व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। मां दुर्गा की पूजा से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि यह शरीर और आत्मा को भी शुद्ध करती है।
दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि नवरात्र पर मां दुर्गा जब धरती पर आती हैं तो किसी न किसी वाहन से आती हैं। साथ ही, उनके आगमन और प्रस्थान का वाहन तय होता है। हाथी को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, अच्छी फसल और रुपये-पैसे की कमी नहीं रहती है। मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और 7 अप्रैल को हाथी पर ही प्रस्थान करेंगी।
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सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी मां की पूजा
चैत्र नवरात्र में कलश स्थापना 30 मार्च को होगी। इस बार मां जगदंबे की पूजा सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। 29 मार्च को शाम 4:32 बजे प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है और यह तिथि 30 मार्च को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। इसका मतलब है कि पूजा का शुभ समय 30 मार्च की सुबह से शुरू हो जाएगा और जोकि दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा। साथ ही, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
कलश स्थापना के लिए शुभ समय सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, दोपहर 12:01 बजे से 12:50 बजे तक अभिजीत मुहूर्त भी है। इन दोनों मुहूर्तों में कलश स्थापना करना मनोकामना पूर्ण करने वाला होता है।


मां के नौ स्वरूप

नवरात्र का प्रथम दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री को गुड़हल का लाल फूल और सफेद कनेर का फूल प्रिय हैं। इन्हें पूजा में शामिल करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। मां ब्रह्मचारिणी को वट वृक्ष के फूल को चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे जातक को मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। मां चंद्रघंटा को कमल का फूल प्रिय है। इस फूल को पूजा में शामिल करने से जातक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
मां कुष्मांडा को चौथा दिन समर्पित है। मां कुष्मांडा को पीले रंग के फूल और चमेली के फूल चढ़ाने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को आरोग्य जीवन की प्राप्ति होती है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग के फूल शामिल किए जाते हैं। ऐसा करने से साधक को सुख-संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां कात्यायनी की पूजा छठवें दिन की जाती है। मां कात्यायनी को गेंदे का फूल जरूर अर्पित करने चाहिए। नवरात्र का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है।
मां कालरात्रि की पूजा में नीले रंग के फूल शामिल करने चाहिए। मां महागौरी की आठवें दिन पूजा-अर्चना करने का विधान है। मां महागौरी को मोगरे का फूल अति प्रिय है। इस दिन पूजा में मोगरे के फूल शामिल करना उत्तम माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। नौवां यानी अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। मां सिद्धिदात्री को चंपा और गुड़हल के फूल अर्पित करने से पूजा सफल होती है।
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