रोहतक। सिगरेट के धुएं से होने वाली फेफड़ों की गंभीर बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) को तेजी से नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके लिए हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने मोमेटासोन फ्यूरोएट नामक दवा आधारित नैनो फाॅर्मूलेशन पर पिछले माह 20 मार्च को रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है।
वर्ष 2025-26 के लिए हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद की तरफ से इसके लिए 32 लाख रुपये का फंड जारी किया गया है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फेफड़ों की सूजन और एलर्जी पर जल्द नियंत्रण पाया जा सकेगा। इससे मरीजों को सांस लेने में होने वाली दिक्कत से राहत मिलेगी।
यह नैनो पार्टिकुलेट ड्रग डिलीवरी सिस्टम कम डोज में ज्यादा असर दिखाता है। साइड इफेक्ट भी कम है। एमडीयू के डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. हरीश दुरेजा और एसोसिएट डीन प्रो. कृष्णकांत शर्मा ने इस पर शोध शुरू कर दिया है।
प्रोजेक्ट को दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहले भी प्रो. हरीश दुरेजा ने अपनी शोधार्थी निशा गुलाटी के साथ मिलकर रोफ्लूमिलास्ट दवा का नैनो सस्पेंशन तैयार किया है। (संवाद)
सीधे फेफड़ों के प्रभावित हिस्से तक सटीक पहुंचती है दवा
कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि मोमेटासोन नैनो फॉर्म एक कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवा है जो सूजन और एलर्जी को कम करती है। जब इसे नैनो फाॅर्मूलेशन में दिया जाता है तो दवा सीधे फेफड़ों के प्रभावित हिस्से तक जल्दी और सटीक पहुंचती है। इससे सूजन को जल्द नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इससे मरीज को जल्द राहत मिलती है। इस प्रोजेक्ट के तहत दवा को नैनो फाॅर्मूलेशन तकनीक से तैयार किया जाएगा।
साइड इफेक्ट पर लगेगी रोक
सीओपीडी मरीजों को लंबे समय तक दवाइयां लेनी पड़ती हैं। इन दवाइयों के साइड इफेक्ट बढ़ जाते हैं। इस नए शोध से दवा की मात्रा कम होगी लेकिन असर ज्यादा होगा। इससे शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव कम होंगे।
वर्जन
इस प्रोजेक्ट के लिए हमें 32 लाख का फंड हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद की तरफ से मिला है। मोमेटासोन नैनो फॉर्म में ज्यादा तेजी से काम करेगी और मरीजों के लिए अधिक प्रभावी साबित होगी।
- प्रो. हरीश दुरेजा, डीन रिसर्च और डेवलपमेंट, एमडीयू रोहतक
2-प्रो. हरीश दुरेजा