माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के सदस्य वीरवार को कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने मांगें पूरी नहीं होने तक रात-दिन लगातार धरना जारी रखने का फैसला लिया। इससे पूर्व सुबह संघ के प्रधान जयबाग मलिक की अध्यक्षता में गेट मीटिंग हुई। मंच संचालन महासचिव सुरेश कौशिक ने किया।
प्रधान ने कहा कि गैर शिक्षक कर्मचारियों की पदोन्नति के संबंध में 25 जनवरी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने निर्णय दिया है। इसे विवि प्रशासन बेवजह लटका रहा है। इसके विरोध में गेट मीटिंग कर विरोध जताया गया। यहीं कर्मचारियों ने धरना देने का फैसला लिया। अब धरना रात को भी जारी रखने का फैसला लिया गया है।
प्रधान ने कहा कि विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के दो कैडरों के बीच पिछले कई साल से कोर्ट केस चल रहा था। इससे कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता रुका हुआ था। इस केस में अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने विश्वविद्यालय को कर्मचारियों के पदोन्नति दोबारा चालू करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रशासन ढुलमुल रवैया अपनाते हुए कोर्ट के फैसले में भी दोबारा कानूनी सलाह के लिए मामला भेजा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में भारी रोष है। पहले ही कर्मचारियों को पदोन्नति की बाट जोहते हुए लगभग चार से पांच साल बीत चुके हैं। इनमें से कुछ तो विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं। वर्ष 2014 के बाद से कोई भी नियमित भर्ती विवि में नहीं हुई है इस कारण कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। इन्हीं के साथ प्रशासन भी कर्मचारियों का शोषण करने में पीछे नहीं हट रहा है। नतीजतन कर्मचारी अपने हक की आवाज उठाते हुए ठंड के बावजूद रात में भी धरना देने को विवश हैं।
एमडीयू शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विकास सिवाच ने धरने को समर्थन देते हुए अपने विचार रखे। प्रशासन के किये जा रहे अन्याय के विरोध में पूर्व प्रधान रणधीर कटारिया, फूल कुमार बोहत, कुलवंत मलिक, पूर्व महासचिव राजकुमार शर्मा, सुनील सैनी समेत अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।