सरसों की फसल इस बार किसानों के लिए सोना बन गई है। पिछले कई सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकारी खरीद के दौरान किसी फसल का मार्केट रेट उसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी ज्यादा हो जाए। सरसों का एमएसपी इस बार 4650 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जबकि नई अनाज मंडी में खुली बोली में 5100 रुपये तक बिकी है। रबी खरीद सीजन में शुक्रवार तक व्यापारियों ने रोहतक मंडी में करीब 5300 क्विंटल सरसों एमएसपी से ज्यादा बोली लगा कर खरीदी है।
कृषि विभाग, मार्केट कमेटी, आढ़तियों और किसानों, सभी का मानना है कि पिछले कई सालों के दौरान उन्होंने किसी भी फसल को सरकारी खरीद के दौरान एमएसपी से ऊपर बिकते नहीं देखा। माहिरों का मानना है कि सरसों के तेल की मांग और आपूर्ति में आए अंतर से अन्नदाताओं में खुशी का माहौल है। हर साल सीजन के बाद मिलर्स के पास सरसों का स्टॉक रहता है, जिसे कैरी फॉरवर्ड स्टॉक कहते हैं। लेकिन 2020 में ऐसा स्टॉक बिल्कुल नहीं था। दूसरी तरफ पामोलिन के रेट बढ़ गए, सरसों का तेल उससे बेहतर माना जाता है। ऐसे में लोगों का रुझान सरसों के तेल की तरफ बढ़ा पर सरसों का स्टॉक नहीं था। इसके चलते दिसंबर 2020 में सरसों के तेल के दाम बेतहाशा बढ़ गए थे। तभी से सरसों की मांग बनी हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले पांच माह से ही सरसों के रेट 5500 के पास चल रहे थे, एक बार तो छह हजार तक पहुंच गए थे। इसकी एक वजह यह भी है कि केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों का आयात घटा दिया था। रोहतक अनाज मंडी में सरसों की अधिकारिक खरीद 28 मार्च को शुरू हो गई थी, पर अब तक एक भी किसान ने सरकार को सरसों नहीं बेची है। इस साल 22 हजार मीट्रिक टन सरसों उत्पादन की उम्मीद है।
मांग के कारण बढ़े रेट
कलानौर के बलम गांव निवासी जगबीर सिंह ने एक अप्रैल को रोहतक मंडी में अपनी 489 क्विंटल से ज्यादा सरसों बेची। उनकी सरसों 4995 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी। उनके आसपास के गांवों के लोगों ने भी इसी के आसपास रेट पर सरसों बेची है। जगबीर सिंह ने कहा कि कोटा, बूंदी, भरतपुर की मिलें सरसों का स्टॉक न होने के कारण पिछले साल के अंत में बंद हो गई थीं। पिछले साल मिलों के पास सरसों नहीं थी, सारा स्टॉक सरकार के पास था। इसी कारण सरसों के तेल के रेट बढ़े थे। एक माह पहले सरसों 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई थी।
पिछले साल मिलों के पास सरसों का स्टॉक बिल्कुल नहीं था। दूसरी तरफ सरसों की मांग ज्यादा हो गई। दिसंबर 2020 में सरसों के रेट 6200 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए थे। क्योंकि किसी के पास स्टॉक नहीं था। सारा स्टॉक सरकार के पास ही था। ऐसे 2016-17 में भी कुछ समय के लिए हुआ था।
- हर्ष गिरधर, जिला प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन
आमतौर पर सरकारी खरीद के दौरान किसी फसल के रेट एमएसपी से ऊपर नहीं जाते। करीब छह माह से ही सरसों के रेट ज्यादा चल रहे थे, यह 5500-5600 रुपये में भी बिकी है। सरसों के तेल की मांग बढ़ने से सरसों के दाम भी बढ़ गए।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक कृषि
सरसों मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बिक रही है जो किसानों के लिए बहुत अच्छा है। पिछले कई सालों के दौरान किसी फसल को सरकारी खरीद के दौरान एमएसपी से ऊपर बिकते नहीं देखा।
- प्रीत सिंह, जिला प्रधान, किसान सभा