रोहतक। पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (आईएमएच) में एमफिल साइकिएट्रिक सोशल वर्क (पीएसडब्ल्यू) (2023–25 बैच) के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मानसिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही, विभागीय स्तर पर झूठे आरोप लगाकर उनका भविष्य खतरे में डाला जा रहा है।
इस संबंध में विद्यार्थियों ने यूएचएस के कुलपति डाॅ. एचके अग्रवाल को पत्र लिखा है। इसमें समस्या के समाधान की गुहार लगाई है। सुनवाई नहीं होने पर 2 जून को सांकेतिक धरना देने व सामूहिक रूप से कोर्स छोड़ने की चेतावनी दी है।
विद्यार्थियों ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार संस्थान के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से मिलकर व लिखित शिकायत दे चुके हैं। इसके बावजूद कोई समाधान नहीं निकाला गया। इसके विपरीत, अब छात्रावास अधीक्षक विद्यार्थियों पर हॉस्टल में एसी का प्रयोग करने का झूठा आरोप लगा रहे हैं।
वर्ष 2024 में स्वयं प्रशासन ने लिखित रूप में स्पष्ट किया था कि एमफिल पीएसडब्ल्यू छात्र एसी का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। प्रशासन अधीक्षक को बचाने के प्रयास में छात्रों को ही बलि का बकरा बना रहा है। इससे उनका शैक्षणिक व मानसिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहा है।
ये हैं प्रमुख मांगें
हॉस्टल की फीस भरने को तैयार हैं, लेकिन बिना सूचना लगाया जुर्माना तुरंत हटाया जाए। जिन भी अधिकारियों की गलती है, उनके खिलाफ लिखित में विभागीय कार्रवाई की जाए। छात्रावास अधीक्षक के लगाए झूठे आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। छात्रों को पढ़ने के लिए शांत व भेदभाव-मुक्त वातावरण प्रदान किया जाए। विरोध स्वरूप नहीं दी गई परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाए। परीक्षा के दौरान छात्रों पर जबरन क्लीनिकल ड्यूटी थोपकर अनुपस्थित दिखाने पर स्पष्टीकरण दिया जाए।