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एक्सपोर्ट कोटे की चीनी तुरंत बेचेंगी मिलें

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डीसी व सहकारी चीनी मिल के अध्यक्ष आरएस वर्मा की अगुवाई में भाली आनंदपुर व महम चीनी मिलों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अलग-अलग बैठक हुईं। जिनमें मिलों में मौजूद एक्सपोर्ट कोटे की चीनी तुरंत बेचने का फैसला किया गया।
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डीसी ने कहा कि चीनी बेचने से जो आमदनी होगी उससे किसानों की बकाया राशि का भुगतान किया जा सकेगा। इस समय महम में पांच लाख क्विंटल और रोहतक मिल में 4.76 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है। दोनों मिलों के प्रबंधकों ने पिछले पेराई सत्र की उपलब्धियां बताईं। रोहतक मिल के एमडी मानव मलिक ने बताया कि किसानों को भुगतान के मामले में मिल राज्य में सबसे आगे है। मिल में 149 दिनों में 45.91 क्विंटल गन्ने की पेराई की गई। जिसकी भुगतान राशि 155.98 करोड़ बनती है, अब तक 78.44 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। सीजन के दौरान 4 लाख 43 हजार 721 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ, रिकवरी प्रतिशत 9.69 फीसदी रहा। पॉवर पर्चेज सेंटर को इस सीजन में 13.75 करोड़ की बिजली निर्यात की गई। जिसकी दर 6.17 रुपये प्रति यूनिट थी। हर साल पचास लाख की बगास खरीदी जाती है, इस बार चालीस हजार क्विंटल बगास बच गई, जो अगले सीजन में खरीदनी नहीं पड़ेगी।
पिछले साल 340932 क्विंटल चीनी बेची गई, केंद्र सरकार की नीति के अनुसार 80000 क्विंटल चीनी निर्यात की गई। मिल में चीनी विक्रय केंद्र खोला गया जहां कोरोना के दौरान भी चीनी की बिक्री जारी रही। जल्द ही मार्केट में रोहतक मिल की चीनी की छोटी पैकिंग उपलब्ध होगी। जिसकी गुणवत्ता मवाना व धामपुर जैसी निजी मिलों से बेहतर होगी। गन्ने का सर्वे जीपीएस के कराने का प्रोजेक्ट विचाराधीन है। बैठक में एडीसी महेंद्र पाल, महम मिल की एमडी मेजर गायत्री अहलावत, निदेशक मंडल के सदस्य मौजूद थे।
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