देश को 36 साल बाद 200 मीटर में ओलंपिक का टिकट दिलाने वाले धावक धर्मबीर सिंह का ओलंपिक खेलने का सपना टूट गया है। अब वह रियो नहीं जा पाएंगे। नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने सुनवाई के बाद शनिवार को अपनी रिपोर्ट नहीं दी। बताया जा रहा है कि एंटी डोपिंग एजेंसी ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जबकि रियो जाने के लिए धर्मबीर के पास शनिवार आखिरी दिन था। अब यदि नाडा की रिपोर्ट धर्मबीर के खिलाफ आती है और उस पर किसी तरह का प्रतिबंध लगा जाता है तो वह अगले साल वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी नहीं खेल पाएगा। इस तरह धर्मबीर के भविष्य का फैसला नाडा पर टिका है।
ओलंपिक का टिकट दिलाने वाले धावक धर्मबीर रियो जाने से पहले ही डोप में फंस गये। इसके बाद उन्होंने अपनी बेगुनाही के लिए नाडा में अपील की। धर्मबीर को 28 अगस्त को सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन तब तक ओलंपिक खत्म हो जाता। इस कारण भाजपा के जिले से लेकर केंद्रीय स्तर के पदाधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया। जिसके बाद धर्मबीर के मामले में सुनवाई के लिए नाडा के डीजी नवीन अग्रवाल ने कमेटी का गठन किया और शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई में धर्मबीर ने अपना पक्ष रखा और खुद को बेकसूर बताते हुए अपने साथ साजिश का आरोप लगाया। हालांकि, धर्मबीर यह नहीं बता सका कि साजिश को किसने और क्यों रची? माना जा रहा था कि कमेटी अपना फैसला शनिवार को सुना देगी तो धर्मबीर के पक्ष में फैसला आने पर उसे ओलंपिक भेज दिया जाएगा। लेकिन नाडा ने शनिवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। इसी के साथ धर्मबीर का ओलंपिक जाने का सपना टूट गया। वह केवल शनिवार तक ही रियो के लिए रवाना हो सकता था। धर्मबीर के रियो नहीं जाने से केवल उसका ही नहीं, बल्कि उसके कोच डा. रमेश सिंधु का भी सपना टूट गया है। वह काफी आहत हैं। अब केवल यह आस बची है कि नाडा धर्मबीर को क्लीन चिट दे दे तो उस पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगेगा। इससे वह अगले साल वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में खेल सकेगा। धर्मबीर पर यदि किसी तरह का प्रतिबंध लग जाता है तो उसकी वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में खेलने की उम्मीद भी टूट जाएगी।