झज्जर से पैदल चल कर काठमंडी के पास से जाते गया बिहार के प्रवासी मजदूर।
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घर जाने के लिए झज्जर से पैदल रोहतक पहुंचे श्रमिक बोले
खाने-पीने की हो रही है दिक्कत, अब यहां रहकर क्या करेंगे
सिर पर सामान से भरा बोरा उठाए तेज कदमों से सड़क नापते कदम। आंखों में घर जाने का सपना। नजर नजारा शहर के काठमंडी इलाके का है। यहां झज्जर से पैदल पहुंचे प्रवासी मजदूर तेजी से रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ रहे थे। उन्हें अपने घर जाना है। अमर उजाला ने बात की तो कोरोना का खौफ साफ नजर आया। गोपाल, मनोज, हरी ने कहा कि लॉकडाउन में छूट तो मिली है, मगर काम धंधा तो नहीं है। काम नहीं होने के कारण खाने-पीने की दिक्कत हो रही है। पास में जो कमा कर रखा था, वह भी लॉकडाउन में खत्म हो गया। अब घर जाने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा है। यहां रहकर क्या करेंगे। इसलिए झज्जर से पैदल यहां पहुंचे हैं। रोहतक रेलवे स्टेशन से ट्रेन में जगह मिलने की उम्मीद है। रात यहीं गुजार लेंगे। शुक्रवार को ट्रेन से घर चले जाएंगे। हम दस लोग हैं। इसमें चार 14-15 साल के हैं। सभी सुबह से चले हुए हैं। स्टेशन पर कुछ खाने का बंदोबस्त करेंगे। पानी पीकर यहां तक पहुंचे हैं।
कोरोना का खौफ प्रवासी मजदूरों के दिलों में घर कर गया है। लॉकडाउन में रुके काम फिर शुरू हो गए हैं। इसके बावजूद प्रवासी यहां रुकने को तैयार नहीं हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन ने वीरवार को 640 मजदूरों को उनके गृह राज्य भेजने के लिए यूपी रवाना किया। डीएसपी गोरखपाल राणा की देखरेख में रोडवेज की 16 बसें राजीव गांधी खेल परिसर से सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रवाना की गई। बिहार जाने को लालायित प्रवासी मजदूरों को घर भेजने का सिलसिला जारी है। जिला प्रशासन लगातार रोडवेज बसों व ट्रेनों के जरिये उन्हें घर भेजने की व्यवस्था कर रहा है। इसी कड़ी में वीरवार को 16 बसों में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए 40 लोगों के हिसाब से 640 लोगों को उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया। बस चालक व परिचालक उन्हें उनके गृह जिले छोड़कर लौटेंगे। यही नहीं, शुक्रवार को असम जाने वाले मजदूरों को घर भेजा जाएगा। इसके लिए बस के जरिये उन्हें गुरुग्राम ले जाया जाएगा। यहां से ट्रेन के जरिये उन्हें घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
Migrant said problem of eating and drinking, now what will he do while staying here- फोटो : RohtakCity