महम। वीरवार को दुर्घटना में जान गंवाने वाले मेहर सिंह का जन्म महम कस्बे के गोयत पाना में 1941 भलेराम नंबरदार के घर हुआ था। उसके बाद परिवार शहर के साथ लगते गांव किशनगढ़ में आ गया।
मेहर सिंह गांव में हुए आपसी झगड़े व मनमुटाव निपटाने में माहिर माने जाते रहेंगे। आपस में मनमुटाव व विवाद के मामले में उनको बुलाया जाता था। वह मामले को पुलिस के बजाय घर में निपटाकर दोनों पक्षों को खुश करके ही दम लेते थे। महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत के प्रधान मेहर सिंह नंबरदार की मौत की सूचना मिलते ही क्षेत्र के लोगों का उनके निवास पर तांता लगना शुरू हो गया।
मेहर सिंह ने बचपन में ही घर का काम संभाल लिया था। पिता की वृद्धावस्था के दौरान उनके स्थान पर नंबरदार का कार्य संभाला। 2011 में पिता की मौत के बाद नंबरदार का पद मिल गया। इस दौरान उन्होंने अनेक सामाजिक कार्यों में भाग लिया, जिससे प्रभावित होकर क्षेत्र के लोगों ने उनको महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत के प्रधान की जिम्मेदारी सौंप दी।