हाईकोर्ट की रोक लगने के बाद पीजीआईएमएस में एमबीबीएस में एडमिशन लेने वाले उन विद्यार्थियों पर संकट मंडरा गया है, जिन्होंने 8 सितंबर के बाद एडमिशन लिया है। पीजीआईएमएस में एडमिशन पा चुके मोहित शर्मा, रजत सिंगला, गौरव चित्कारा और सोनू आदि का कहना है कि उन्होंने ईबीपी (इकोनोमिक बैकवर्ड पर्सन) कैटेगिरी के तहत प्रवेश लिया था। संस्थान में 16 सीटें हैं, जिसमें 13 सीट भर चुकी हैं। एडमिशन के लिए उन्होंने 52 हजार रुपये फीस और 23 हजार रुपये हॉस्टल फीस भी जमा कर दी है। पीजीआईएमएस में एडमिशन लेने के लिए उन्होंने आल इंडिया की काउंसिलिंग भी छोड़ दी थी। ऐसे में हाईकोर्ट की तरफ से रोक लगने के बाद उनका करिअर बर्बाद हो गया। छात्रों का कहना है कि वह हाईकोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन इसमें छात्रों का क्या कसूर है, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस रोक के बाद अब यह समझ नहीं आ रहा है कि उनका क्या होगा? वह कहां जाएंगे? हालांकि देर रात पीजीआईएमएस की तरफ से इस पर कोई बयान जारी नहीं किया था।
पीजीआईएमएस में हुई दूसरी काउंसिलिंग
उधर, पीजीआईएमएस में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों के दाखिलों के लिए प्रथम दिन सामान्य श्रेणी सीटों के लिए दूसरी काउंसिलिंग हुई। रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को पीजीआईएमएस, भगत फूलसिंह राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां, शहीद हसनखान मेवाती राजकीय मेडिकल कालेज नल्हर मेवात और महाराजा अग्रसेन मेडिकल कालेज अग्रोहा, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों की दूसरी कांउसलिंग हुई। इस मौके पर डीएमईआर अतिरिक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय कुमार, डॉ. एससी नरूला, डॉ. विजय शंकर, डॉ. विजयपाल खनगवाल और एडीए अंजू कटारिया मौजूद रहे।