रोहतक। एमडीयू का स्थापना दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि गौरवशाली उपलब्धियों व भविष्य के संकल्पों का प्रतीक है। रोहतक में 19 अप्रैल 1976 को स्थापित एमडीयू ने पांच दशकों में देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। यह कहना है कुलपति प्रो. मिलाप पूनियां का। वह रविवार को विवि के स्थापना दिवस पर बोल रहे थे।
कुलपति ने कहा कि एमडीयू आज शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थान बन चुका है। विश्वविद्यालय को शिक्षा मंत्रालय की एनआईआरएफ रैंकिंग में शीर्ष 100 में स्थान मिला है। वर्ष 2019 में नैक के जरिए ए प्लस ग्रेड से सम्मानित किया गया।
2020 में ग्रीन मेंटर संस्थान और 2018 में देश के सबसे स्वच्छ विश्वविद्यालय परिसरों में शामिल होना इसकी बड़ी उपलब्धियां हैं। कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि सोच और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने सर छोटूराम की प्रेरणादायी विरासत को याद करते हुए युवाओं को शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एमडीयू के लिए नए अवसर लेकर आई है। विश्वविद्यालय बहुविषयक शिक्षा, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इसके तहत गुणवत्तापूर्ण शोध, समावेशी वातावरण, वैश्विक मूल्यों के अनुरूप व्यक्तित्व विकास और शिक्षकों के पेशेवर विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कुलपति ने कहा कि आने वाले समय में छात्र कल्याण, जेंडर सेंसिटाइजेशन, नशा मुक्ति अभियान, सामाजिक समावेशन, मानसिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने एमडीयू डिस्टिंग्विश्ड लेक्चर सीरीज 2026 शुरू करने की घोषणा की। इसमें देश-विदेश के ख्याति प्राप्त विद्वान और विशेषज्ञ समसामयिक विषयों पर व्याख्यान देंगे। साथ ही भविष्य में स्थापना दिवस पर विशेष लेक्चर कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।