पीजीआईएमएस के कोरोना योद्धाओं के लिए फैकल्टी हाउस में क्वारंटीन सेंटर बनाने से इनकार करने पर एमडीयू प्रशासन चारों तरफ से घिर गया है। सोमवार को इस मुद्दे को लेकर लघु सचिवालय में अहम बैठक हुई। इस दौरान एमडीयू प्रतिनिधि अपने फैसले पर कायम दिखे। बैठक में एमडीयू शिक्षक संघ प्रधान डॉ. विकास सिवाच नेकहा कि फैकल्टी हाउस में क्वारंटीन सेंटर बनने से उनके परिवारों को संक्रमण का खतरा हो सकता है। अगर यहां क्वारंटीन सेंटर बनाया जाएगा तो प्रशासन हमें बसें दे दे, हम पांच हजार लोग गांवों में चले जाएंगे। इसके जवाब में डीसी आरएस वर्मा ने कहा कि बसों को छोड़ो, मुझे जिले के बारह लाख लोगों की चिंता है, तुम पांच हजार भी उसी का हिस्सा हो। सभी की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है। इस संकट के समय कोरोना वॉरियर्स के रूप में बेहतरीन काम कर रहे डॉक्टरों व स्टाफ का हौसला बढ़ाना है। उन्हें बुनियादी सुविधाएं देकर उनका सहयोग करें।
निगम कमिश्नर प्रदीप गोदारा ने कहा कि हमें नैतिकता के आधार पर कोरोना योद्धाओं को सुविधाएं मुहैया करवाने को आगे आना चाहिए। निगम के कर्मचारी भी सफाई में लगे हैं, कोरोना संक्रमित मृतकों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं, क्या उन्हें खतरा नहीं है। वहीं, एसपी राहुल शर्मा ने कहा कि पुलिस बल तो सबसे ज्यादा खतरे में काम कर रहा है। एमडीयू और पीजीआई रोहतक की शान हैं। एमडीयू को ऐसे समय में सहयोग करना चाहिए। इस पर एमडीयू प्रतिनिधि ने कहा कि दिल्ली में कोरोना से कांस्टेबल की मौत हुई, कुछ देर पहले ही उसमें लक्षण नजर आए थे। इसके जवाब में एसपी ने कहा कि अगर कोरोना को लेकर किसी को कोई भ्रांतियां हैं तो पीजीआई के माहिर उसे दूर कर सकते हैं। वहीं, पीजीआई प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि अगर एमडीयू में किसी को कोरोना हो गया तो वे कहां जाएंगे। एमडीयू के बहुत से लोग पीजीआई में नौकरी करते हैं, उन्हें क्या घर से निकाल दिया है। इसके बाद एमडीयू प्रतिनिधियों के पास कोई जवाब नहीं था। बैठक में पीजीआई के वीसी डॉ. ओपी कालड़ा, एमडीयू के रजिस्ट्रार गुलशन तनेजा व टीचिंग यूनियन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
प्रशासन सख्त, फैकल्टी हाउस तो क्वारंटीन सेंटर बन गया
बैठक के दौरान डीसी वर्मा ने स्पष्ट कह दिया कि पीजीआई के डॉक्टरों के लिए एमडीयू के फैकल्टी हाउस में क्वारंटीन सेंटर बना दिया है। जिला परिषद के सीईओ ब्रह्म प्रकाश अहलावत को नोडल अफसर नियुक्त किया है। एमडीयू अधिकारी सहयोग करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फैकल्टी हाउस में किसी संक्रमित को नहीं रखा जाएगा। जिला प्रशासन ने एमडीयू प्रशासन से इस बारे में सहमति ली है। पीजीआई के डॉक्टरों को वहां सिर्फ क्वारंटीन किया जाएगा। कोई भी पॉजिटिव मिला तो उसे कोविड अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। निगम कमिश्नर प्रदीप गोदारा ने भी एमडीयू प्रतिनिधियों से दो टूक कह दिया कि महामारी अधिनियम के तहत सभी संसाधनों व संस्थानों का प्रयोग करने की शक्ति जिलाधीश के पास निहित है।
पिछली मीटिंग में दिया था यूनियनों का हवाला
पिछली मीटिंग में एमडीयू प्रतिनिधियों ने दलील दी थी कि उनके यहां टीचिंग, नॉन टीचिंग स्टाफ और विद्यार्थियों की मजबूत यूनियनें हैं। उनके दबाव के कारण वे यह फैसला नहीं ले पा रहे हैं। इसके जवाब में डीसी वर्मा ने कहा था कि यूनियन तो पुलिस की भी है। वे अगर एक घंटा काम बंद कर दें तो क्राइम रेट कहां पहुंच जाएगा। इसी तरह सफाई कर्मचारियों की भी यूनियन है, वे काम बंद कर दें तो सारे शहर में गंदगी के ढेर लग जाएंगे।
अंतिम संस्कार का भी किया था विरोध
कोरोना को लेकर जिला प्रशासन ने पहले लॉकडाउन लागू करवाना शुरू किया। फिर प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन का इंतजाम को मुहिम चलाई। शहर के लगभग सभी सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, औद्योगिक, शैक्षणिक संगठनों ने इसमें बढ़-चढ़ कर सहयोग किया। लेकिन इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद एमडीयू की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। जिलाधीश ने एमडीयू की एक साइट को कोरोना संक्रमित मृतकों के संस्कार के लिए प्रयोग करने के आदेश दिए तभी भी एमडीयू ने विरोध जताया था।
पीजीआई के डॉक्टरों से सौतेला व्यवहार न करे एमडीयू : इनसो
इनसो के प्रदेश अध्यक्ष व एमडीयू के शोधार्थी प्रदीप देशवाल कहा कि एमडीयू का पीजीआई के साथ पुराना और अटूट रिश्ता है। अपने निजी फायदे छोड़ हमें कोरोना योद्धाओं का दिल और दरवाजे खोल कर स्वागत करना चाहिए। अगर फैकल्टी हाउस में डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था की जाती है तो यह हमारे लिए गर्व की बात होगी। अगर एमडीयू के वीसी इसकी अनुमति नहीं देते तो कार्यकर्ता अपने हॉस्टल रूम डॉक्टरों को समर्पित करेंगे। डॉक्टरों के प्रति एमडीयू सौतेला व्यवहार न करे। इनसो का प्रतिनिधिमंडल शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारी संघ से इस बारे में मुलाकात करेगा।
प्रशासन जिस जगह क्वारंटीन सेंटर बनाने की बात कर रहा है, उसके एक तरफ वीसी आवास है, दूसरी तरफ टीचर रहते हैं। हमें एमडीयू में रहने वाले पांच हजार लोगों के स्वास्थ्य की चिंता, जो जायज है।
- डॉ. विकास सिवाच, प्रधान, एमडीयू शिक्षक संघ