एमडीयू को भले ही ‘ए’ ग्रेड यूनिवर्सिटी का दर्जा हो, लेकिन यहां पर घोटालों और फर्जीवाड़े भी कम नहीं हैं।
ऐसे में विवादों के बीच नवनियुक्त रजिस्ट्रार की कुर्सी किसी चुनौती से कम नहीं है। शिक्षा का स्तर और संसाधनों के मामले में यूनिवर्सिटी काफी बेहतर है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यहां पर स्टाफ के बीच आपसी तालमेल नहीं होना है।
यूनिवर्सिटी में एक या दो खेमे नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे न जाने कितनी गुटबाजी चल रही है। इससे ज्यादा हालात ओर अधिक क्या खराब होंगे कि यहां के फैकल्टी के बीच सरेराह मारपीट की घटनाएं भी चुकी है।
दूसरी बड़ी समस्या है यहां पर छात्र गुटों का हावी होना। यूनिवर्सिटी में असीमित छात्र संगठन है। बड़े संगठनों के अलावा छोटे-छोटे संगठन भी आए दिन किसी न किसी मुद्दे को लेकर हंगामे करते हैं।
इसके अलावा डिपार्टमेंट में चलने वाली अंदरूनी कलह और फर्जीवाड़े का तो कोई तोड़ ही नहीं है। पिछले कुछ दिनों की बात करें तो यूनिवर्सिटी में लगातार एक के बाद एक तीन अंक घोटाले सामने आए।
हालांकि मामले को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन घोटाले जनता के सामने उजागर हो गए। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी में फर्जी भर्तीवाड़े भी कुछ कम नहीं है। कई माह पूर्व डीईओ भर्ती फर्जीवाड़ा सामने आया था, जिसका मामला राज्यपाल तक भी गूंजा था और फर्जी भर्ती पर रोक लगाई थी। हाल ही में यूआईईटी डिपार्टमेंट में भी गलत तरीके से वेकेंसी निकाली गई थी। विरोध होने के कारण इस वेकेंसी पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई। हर मामले को लेकर यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगे हैं, जिस कारण न केवल यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि यहां का स्टाफ से लेकर छात्र तक सभी प्रशासन पर हावी रहते हैं। इनके अतिरिक्त भी यूनिवर्सिटी के ढेरों ऐसे मामले है, जो अंदर ही अंदर यूनिवर्सिटी को खोखला कर रहे हैं। ऐसे में नए रजिस्ट्रार का कार्यकाल कितना बेहतर होगा और क्या वह इन सब पर रोक लगा पाएंगे यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। फिलहाल जो भी हो, लेकिन नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर यूनिवर्सिटी के स्टाफ से लेकर छात्रों में खुशी का माहौल है।