महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की परीक्षा में एक बार फिर लापरवाही सामने आई है। 30 नवंबर को रद्द हुए बीए तीसरे सेमेस्टर के पेपर ने सोमवार को असमंजस की स्थिति पैदा कर दी। यूनिवर्सिटी की लापरवाही के चलते पुरानी स्कीम वाले परीक्षार्थियों के साथ-साथ नई स्कीम के परीक्षार्थी भी पेपर देने पहुंच गए, जबकि उनका पेपर रद्द नहीं हुआ था। हालांकि, पेपर शुरू होने के कुछ देर बाद नई स्कीम के परीक्षार्थी बाहर निकलकर आ गए और यूनिवर्सिटी में पहुंचकर हंगामा एवं प्रदर्शन किया।
दरअसल, 30 नवंबर को बीए तीसरे सेमेस्टर की अंग्रेजी कंप्लसरी (कोड संख्या 92101) की री-अपीयर का पेपर हुआ था। इसमें पुरानी स्कीम 2012-13 और नई स्कीम के परीक्षार्थी शामिल हुए थे। उस समय पेपर पर अलग से कोई पहचान नहीं होने के कारण पुरानी स्कीम के परीक्षार्थियों को गलत पेपर दे दिया गया था। मामला संज्ञान में आने पर यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग ने उसे रद्द कर दिया। पेपर रद्द करने के बाद भी एमडीयू की तरफ से जो नोटिस जारी किया गया उसमें केवल कोड संख्या दी गई। इससे परीक्षार्थी असमंजस की स्थिति में आ गए कि आखिर पेपर नई स्कीम का रद्द हुआ है या फिर पुरानी का। असमंजस के चलते सोमवार को दोनों स्कीम के परीक्षार्थी जाट कॉलेज और पंडित नेकीराम शर्मा आदि कॉलेजों में सुबह साढ़े नौ बजे पेपर देने पहुंच गए। लापरवाही की हद यह रही कि कॉलेजों ने भी दोनों स्कीम के परीक्षार्थियों को पेपर बांट दिया, जबकि पेपर केवल पुरानी स्कीम के परीक्षार्थियों का था। कुछ देर बाद नई स्कीम के परीक्षार्थियों ने पेपर को आउट ऑफ सिलेबस बताकर हंगामा कर दिया और पेपर छोड़कर दोनों कॉलेजों के परीक्षार्थी यूनिवर्सिटी पहुंच गए। उन्होंने वीसी के सामने हंगामा-प्रदर्शन किया। वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने आश्वासन दिया कि परीक्षार्थियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद परीक्षार्थी शांत हुए।
लापरवाही एमडीयू की, परीक्षार्थी परेशान
मामले में एमडीयू की लापरवाही सामने आई है। दरअसल, दोनों स्कीम के परीक्षार्थियों के पेपर का कोड 92101 था। 30 नवंबर को हुए पेपर में भी पेपर पर कोई संकेतक नहीं दिया गया कि यह पेपर कौन सी स्कीम का है, जबकि पेपर दोनों अलग-अलग थे। इसी वजह से कॉलेजों में गलत पेपर बांट दिया गया। इसके बाद भी एमडीयू की लापरवाही कम नहीं रही। पेपर रद्द होने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। नोटिफिकेशन में भी केवल कोड संख्या दी गई। यह स्थिति स्पष्ट नहीं की गई कि पेपर कौन सी स्कीम के परीक्षार्थियों का रद्द हुआ है। इसी असमंजस में नई स्कीम वाले परीक्षार्थी भी पेपर देने पहुंच गए।
कॉलेजों की परीक्षा प्रणाली सवालों के घेरे में
इस प्रकरण में एमडीयू की लापरवाही तो रही ही है, कॉलेजों की परीक्षा प्रणाली भी सवालों के घेरे में है। जिस दिन जितने परीक्षार्थियों का पेपर होता है उसका रिकार्ड कॉलेज के पास रहता है। सवाल यह है कि जब सोमवार को पुरानी स्कीम के परीक्षार्थियों का पेपर था तो नई स्कीम के परीक्षार्थियों को किस आधार पर पेपर में बैठा दिया गया। इस तरह तो कॉलेजों में कोई भी जाकर पेपर दे सकता है।
महम कॉलेज में भी परीक्षार्थियों ने छोड़ा पेपर
महम। स्थानीय राजकीय कॉलेज में भी आउट ऑफ सिलेबस पेपर बताकर परीक्षार्थियों ने पेपर छोड़ दिया। परीक्षार्थी सुमन, पिंकी, सोनिया, अनिल, नसीब, संदीप, सुमित व अमरजीत आदि ने बताया कि पेपर सिलेबस से बाहर का दिया गया था। इस कारण उन्हें परेशानी हो रही थी। उधर, प्राचार्य रोहित कुमार का कहना है कि परीक्षार्थियों की आपत्ति विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दी गई है।
इनसो ने किया यूनिवर्सिटी में हंगामा
पेपर प्रकरण को लेकर जाट कॉलेज इनसो प्रधान अभिषेक देशवाल व छात्र नेता दीपक मलिक के नेतृत्व में परीक्षार्थी यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने वीसी और परीक्षा नियंत्रक को समस्या बताई। कुलपति के आश्वासन के बाद छात्र शांत होकर लौटे। इस मौके पर सुखविन्द्र पुनिया, राहुल बधवार, जितिन डागर, रोहित मलिक, अजय दहिया आदि मौजूद रहे।
यह बोले अधिकारी
तीस नवंबर को हुए पेपरों में केवल साल 2012-13 की स्कीम के छात्रों का पेपर रद्द किया गया था, जो सोमवार को कराया गया। पेपर के समय नई स्कीम वाले छात्र भी पहुंच गए, जबकि उनका पेपर रद्द नहीं हुआ था। इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन की कोई गलती नहीं है।
- डॉ. बीएस सिंधु, परीक्षा नियंत्रक एमडीयू