तीन माह, दो बड़े झटके और अब सालाना लगेगी करीब 212 करोड़ रुपये की मार। कुछ ऐसा हुआ है प्रदेश की ‘ए’ ग्रेड यूनिवर्सिटी दर्जा प्राप्त एमडीयू का। प्रदेश सरकार ने तीन माह के अंदर पहले बीएड कॉलेज तो अब इंजीनियरिंग कॉलेज छीनकर एमडीयू को दो बड़े झटके दे दिए। बीएड और इंजीनियरिंग कॉलेज छीनने के बाद यूनिवर्सिटी को न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि उसका भविष्य भी सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा है।
अप्रैल माह तक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) 567 कॉलेजों के साथ प्रदेश में उच्च पायदान पर था, लेकिन माह के आखिर में सरकार ने प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी से बीएड कॉलेज छीनकर जींद यूनिवर्सिटी को दे दिए। इसमें सबसे अधिक नुकसान एमडीयू को हुआ। एमडीयू के 327 कॉलेज चले गए, जिनसे उसे लगभग 200 करोड़ की सालाना आमदनी होती थी। इन कॉलेजों को छीनने का दर्द एमडीयू प्रशासन भूला भी नहीं था कि सरकार ने दूसरा बड़ा झटका दे दिया। अब प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज तीन अन्य यूनिवर्सिटी से जोड़ दिए गए। इस झटके में एमडीयू के करीब 80 कॉलेज चले गए। इस तरह तीन माह पहले जिस यूनिवर्सिटी के पास 540 कॉलेजों का कुनबा था अब उसके पास केवल 160 कॉलेज बचे हैं। अनुमानित तौर पर एक इंजीनियरिंग कॉलेज से यूनिवर्सिटी को लगभग 15 लाख रुपये की सालाना कमाई होती है। इसमें कॉलेज की संबद्धता फीस और छात्र के रजिस्ट्रेशन फीस समेत अन्य मद में फीस ली जाती है। इंजीनियरिंग कॉलेज जाने के बाद एमडीयू को सालाना करीब 212का नुकसान होगा।
कुछ ऐसा है एमडीयू का सालाना बजट
एमडीयू में शिक्षक और कर्मचारियों समेत लगभग 700 लोगों का स्टाफ है। स्टाफ के वेतन का सालाना बजट करीब 90 करोड़ रुपये है। इस बजट में सरकार की तरफ से सालाना केवल 24 करोड़ का बजट ही पास किया जाता है। बाकी खर्च यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर वहन करती है। ऐसे में बीएड और इंजीनियरिंग कॉलेज ही एमडीयू की कमाई का जरिया थे। अब यह कॉलेज जाने के बाद यूनिवर्सिटी के पास मात्र 160 कॉलेज बचे हैं। इन कॉलेजों के भरोसे इतने स्टाफ की तनख्वाह पूरी होगी इस पर असमंजस बन गया है।
कहीं छिन न जाएं एनसीआर के भी कॉलेज
बीएड और इंजीनियरिंग कॉलेज छिनने के बाद एमडीयू से एनसीआर के कॉलेज भी छीनने की तैयारी है। अभी तक एमडीयू के तहत रोहतक, झज्जर, गुड़गांव, पलवल, सोनीपत, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, फरीदाबाद और भिवानी जिलों के कॉलेज आते हैं। यदि एमडीयू से एनसीआर के डिग्री कॉलेज छीन लिए गए तो यूनिवर्सिटी केवल रोहतक, सोनीपत और झज्जर जिले तक सिमटकर रह जाएगी।
बीएड और इंजीनियरिंग कॉलेज चले जाने के बाद यूनिवर्सिटी का आर्थिक बजट गड़बड़ाएगा। बीएड कॉलेज जींद यूनिवर्सिटी में चले गए हैं। हालांकि, अभी तक इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए लिखित आदेश नहीं मिला है।
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डवलपमेंट काउंसिल एमडीयू