मेयर रेनू डाबला एक्शन मोड में हैं। नगर निगम के अधिकारियों की मनमानी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी के तहत एमई सत्यवान और सीएसआई त्रिलोक नाथ कोचर को सस्पेंड करने की संस्तुति करते हुए डीसी को पत्र भेजा है। मेयर के नोटिस देने के बावजूद दोनों अधिकारियों ने विकास कार्यों से संबंधित फाइल उन्हें नहीं दी, जबकि उनको इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया था। नोटिस देने के 10 दिन बाद भी फाइल नहीं मिलने पर मेयर ने सस्पेंड करने की संस्तुति की है। वहीं, मेयर ने प्रदेश के अन्य मेयरों के साथ सीएम से होने वाली मीटिंग में निगम के अफसरों की पोल खोलने की बात भी कही है।
मेयर रेनू डाबला ने नगर निगम की ओर से शहर में कराए जाने वाले विकास कार्यों में देरी होने पर सभी कार्यों की फाइल मांगी थी। इसके लिए एक्सईएन केएस पठानिया, एमई सत्यवान, सीएसआई त्रिलोक नाथ कोचर को नोटिस दिया गया था। अधिकारियों को तीन दिन के अंदर फाइल देने के लिए कहा गया था। नोटिस को दिए दस दिन का समय बीत चुका है, लेकिन एमई व सीएसआई ने कोई फाइल मेयर को नहीं दी। जबकि एक्सईएन ने सभी फाइलों को पहुंचा दिया। एमई व सीएसआई की इस हरकत पर मेयर का गुस्सा भड़क गया।
मेयर ने पहली बार दोनों अधिकारियों को सस्पेंड करने की संस्तुति करते हुए डीसी अतुल कुमार को पत्र लिखा है। पत्र की एक कापी अपने पास भी रखी है, जिससे वह प्रदेश में बनी मेयर की कमेटी में उसे दिखा सकें। मेयर ने साफ कहा है कि दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वह निगम के अधिकारियों की पोल सीएम मनोहर लाल खट्टर के सामने खोलेंगी। प्रदेश के नगर निगमों के सभी मेयरों की जल्द ही सीएम से मीटिंग होने वाली है। उस मीटिंग में बताया जाएगा कि किस तरह अधिकारी ही विकास कार्यों के नाम पर जनता को बरगला रहे हैं, जिससे सरकार की बदनामी हो रही है।
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मैंने तीन अधिकारियों से विकास कार्यों की फाइल मांगी थी, लेकिन एमई और सीएसआई ने एक भी फाइल नहीं दी। इसलिए उन्हें सस्पेंड करने के लिए डीसी को पत्र लिखा है। पत्र पर कार्रवाई नहीं होने पर मामला सीएम के सामने रखा जाएगा।
- रेनू डाबला, मेयर नगर निगम
मेयर ने मांगी थी यह फाइल
मेयर ने एक्सईएन केएस पठानिया से पहरावर गौशाला के कार्य की रिपोर्ट मांगी थी। वार्डों में विकास कार्य की रिपोर्ट और एक्सईएन के कार्यक्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा मांगा था। रंगशाला का निर्माण होने के बावजूद उसकी शुरूआत न होने का कारण पूछा था। जर्जर भवनों को नोटिस देने से लेकर इनके लिए बनाई गई योजना का ब्योरा मांगा था। किला मोहल्ला में सुलभ शौचालय का निर्माण न होने पर लापरवाही का कारण पूछा था। राजीव आवासीय योजना की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मांगी थी।
एमई सत्यवान से मेयर ने पार्कों में चल रहे कार्यों का ब्योरा मांगा था। गौशाला के कार्य में लापरवाही और मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट मांगी थी। स्ट्रीट लाइटों पर खर्च होने वाले मासिक बिल और ठेकेदार को मुहैया कराए जाने वाली रकम का ब्यौरा मांगा था। तेज कॉलोनी और फ तेहपुरी चौपाल में चल रहे कार्यों का ब्योरा मांगा था। शहर में चल रहे अन्य कार्यों का ब्योरा भी देने को कहा था।
मेयर ने सीएसआई त्रिलोक नाथ कोचर से शहर में सफ ाई के प्रत्येक ठेके की जानकारी और उनसे संबंधित शिकायतों का ब्योरा मांगा था। प्रस्तावित टेंडरों की प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। आउटसोर्स पर लगाए गए कर्मचारियों की रिपोर्ट के साथ ही नालों की सफ ाई के लिए रखे गए आउटसोर्स के 50 कर्मचारियों का ब्यौरा देने को कहा था। स्वच्छ भारत मिशन में आने वाली ग्रांट का ब्योरा देने को कहा था। स्वच्छ भारत के तहत प्रस्तावित कार्यों की सूची और सुलभ शौचालयों की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी।