खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने रविवार को नई अनाज मंडी का किया तो वे भी स्थिति देख दंग रह गए। उनके मुंह से निकला, ओ माई गॉड। इसके बाद शुरू हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा। डायरेक्टर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को जमकर लताड़ पिलाई। उन्हें कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश देकर वे बहादुरगढ़ की ओर रवाना हो गए। रास्ते में उन्होंने सांपला मंडी का भी जायजा लिया। कुल मिलाकर आराम फरमाने वाले विभाग के अधिकारियों ने संडे होने के बावजूद जमकर पसीना बहाया।
इससे पहले लघु सचिवालय स्थित विभाग के कार्यालय में डिप्टी डायरेक्टर जयपाल सिंह ने रोहतक और झज्जर के अधिकारियों की बैठक ली। दोपहर करीब तीन बजे वे टीम सहित नई अनाज मंडी पहुंचे। यहां पर ढके रखे गेहूं की ओर उनका ध्यान गया। बोरियों और तिरपाल को हटाया गया, तो पर्दे के पीछे छिपी हकीकत उजागर हो गई। गेहूं की बोरियां फटी हुई थीं। उनमें भरा गेहूं पूरी तरह से खराब हो चुका था।
गेहूं का रंग भी काला पड़ने के साथ ही उनसे बदबू भी आ रही थी। उन्होेंने तुरंत अधिकारियों को तलब किया और कारण पूछा। अधिकारियों ने सफाई दी कि गेहूं कुछ दिन पहले ही खरीदा गया था। लेकिन उठान से पहले ही बारिश आ गई, इस वजह से गेहूं भीग गया। बारिश का पानी गेहूं की बोरियों के निचले भाग में चले जाने से गेहूं खराब हो गया है।
डिप्टी डायरेक्टर ने अधिकारियों को तुरंत गेहूं की खराब बोरियों को अलग करने के आदेश दिए, ताकी बाकी का गेहूं खराब नहीं हो। अधिकारियों को उन्होंने इशारों-इशारों में और भी कई निर्देश दिए। इसके बाद वे बहादुरगढ़ के लिए रवाना हो गए। रास्ते में उन्होंने सांपला की अनाजमंडी का भी दौरा किया। यहां भी उन्हें कई खामियां दिखाई दी।
जिले के सभी राशन डिपो की नियमित रूप से चेकिंग की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटियां डिपो संचालक द्वारा बांटे जा रहे गेहूं और अन्य सामग्री की जांच करेंगी। कर्मचारियों को रोजाना डीएफएससी को रिपोर्ट देनी होगी। इस काम में किसी भी तरह की कोताही बरती गई तो कर्मचारियाें को बख्शा नहीं जाएगा। यह निर्देश डिप्टी डायरेक्टर ने कार्यालय में हुई बैठक के दौरान विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को दिए। उन्होंने कहा कि डिपो पर आने वाली हर सामग्री की सैंपलिंग होगी।
डिप्टी डायरेक्टर से सीधी बात
सवाल: मंडियों में अव्यवस्था की वजह।
जवाब: बारिश के कारण व्यवस्था बिगड़ गई थी। अब सब कुछ ठीक है।
सवाल: मंडी में गेहूं का उठान किस गति से चल रहा है।
जवाब: रोहतक मंडी में इस समय 45 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से करीब 40 हजार मीट्रिक टन का उठान हो चुका है। हां, सांपला में अभी स्थिति खराब है। यहां का केवल 33 फीसदी गेहूं का ही उठान हो पाया है।
सवाल: इसकी वजह।
जवाब: मंडी में स्थान कम है। जिस कारण समस्या पैदा हो रही है।
सवाल: इसका कोई समाधान।
जवाब: मंडी का विस्तार किया जाएगा।
सवाल: मंडियों में जो गेहूं खराब हो रहा है। उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
जवाब: जाहिर सी बात है। इसकी पूरी जिम्मेदारी एजेंसी संचालकों को की है।
सवाल: इसका नुकसान कौन भुगतेगा।
जवाब: एजेंसी संचालकों को ही इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों को उनका पैसा मिल चुका है।
सवाल: जो गेहूं खराब हुआ है उसका क्या होगा।
जवाब: करीब 200 बैग गेहूं खराब हुआ है। खराब गेहूं को अलग किया जाएगा। जो गेहूं सही है। उसे नए बैगों में भरने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। बाकी के गेहूं को दोबारा से साफ करने के बाद ही बैगों में भरा जाएगा।