रोहतक। बलियाना की ममता गृहिणी से प्रगतिशील किसान बन गई हैं। वह फल एवं सब्जी उगाकर सालाना दो लाख तक कमा रही हैं। फल व सब्जी को लंबे समय तक संरक्षित करने के साथ अचार व च्यवनप्राश बनाकर किसान बनी ममता दो लाख रुपये सालाना कमा रही हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षित इस प्रगतिशील किसान को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में 23 से 24 मार्च तक आयोजित कृषि मेले में सम्मानित किया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिन का प्रशिक्षण लेकर उनका प्रगतिशील किसान बनने का सफर शुरू हुआ। इसमें आंवले, आम व अन्य फलों से अचार बनाने की विधि सीखी। करीब पांच साल पहले कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग के बाद फल उगाने शुरू किए।
शुरुआत के समय केवल 15 फलाें के पेड़ लगाए थे। अमरूद, आम, आंवला, जामुन, नींबू व अन्य पेड़ लगाए हुए हैं। अब एक एकड़ में इन फलों के करीब 50 पेड़ लगे हैं।
वैद्य की सहायता से आंवले का च्यवनप्राश बनाना शुरू किया। इन फलों से तैयार किया आचार व च्यवनप्राश में किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है। इन्हें प्राकृतिक विधि से तैयार किया जा रहा है।
गांव में ही बेच रही आचार व च्यवनप्राश
ममता पहले गृहिणी थीं। पति के साथ अपने दो बच्चों के लालन-पालन व पशुओं की देखभाल में व्यस्त रहती थीं। अब अपने उगाए फलों से च्यवनप्राश व अचार तैयार कर बेच रही हैं। च्यवनप्राश 600 से 650 रुपये व आचार 200 से 250 प्रति किलो बेच रही हैंं। इससे सालाना करीब दो लाख तक मुनाफा कमा रही हैं।
अब बाहर सप्लाई करने की तैयारी
ममता का कहना है कि गांव में काम चलने के बाद बढ़ाने की कोशिश रहेगी। नई जगह लेकर फलों के पेड़ लगाऊंगी। इससे तैयार किए च्यवनप्राश व अचार को जिले या शहर से बाहर सप्लाई करने की कोशिश रहेगी।