नारनौल। राजस्थान में गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आने लगे हैं। इसके चलते राजस्थान सीमा से सटे महेंद्रगढ़ में भी संक्रमण फैलने का खतरा है। इसको लेकर पशुपाल अलर्ट हो गए हैं।
पशुपालन विभाग ने सभी गोवंश का टीकाकरण कर दिया है, जिससे लंपी बीमारी फैलने का खतरा कम ही है। जिले में 21 पशुगणना के अनुसार करीब 65 हजार गोवंश है जिनका पशुपालन विभाग की तरफ से टीकाकरण किया जा चुका है।
2022 में जब लंपी वायरस का प्रकोप देखने को मिला था तो तब जिले में दो सौ से अधिक गोवंश की मौत हो गई थी। अगर किसी भी गोवंश में लंपी वायरस का लक्षण दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करे ताकि उपचार शुरू किया जा सके।
क्या है लंपी वायरस: लंपी वायरस, स्किन रोग (एलएसडी) एक वायरल रोग है, यह वायरस केप्रिपाक्स, जोकि पाक्स परिवार का वायरस है। यह वायरस मुख्य रूप से गोवंशी को प्रभावित करता है। यह एक गैर-जूनोटिक बीमारी है। जो पशुओं से इंसानों में नहीं होता है। इसके कारण पशुओं में होने वाली मृत्यु दर एक से पांच प्रतिशत तक हो सकती है।
रोग के लक्षण : रोगग्रस्त पशुओं में आरंभ में बुखार, आंख से पानी आना, नाक से साव आना, चलने-फिरने में अनिच्छा, लार गिरना तथा दूध उत्पादन अचानक से घटने जैसे लक्षण आते हैं। इसके बाद पशु के पूरे शरीर पर अथवा विशेषकर सिर, गर्दन, छाती, थनों के आस-पास एवं पैरों में रोग के विशिष्ट लक्षण के रूप में कठोर गोल उभार बन जाते हैं।
वर्जन:
जिले में अभी कोई लंपी वायरस के संक्रमित गोवंश नहीं मिले हैं। साथ ही जिले में सभी गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। जिसकी वजह से इस बार लंपी वायरस का संक्रमण फैलने के कम ही आसार है।- डॉ. नसीब सिंह, उप निदेशक पशुपालन विभाग नारनौल।