रोजगार के नाम पर आरक्षण मांगा गया। दुहाई दी गई कि बच्चों का भविष्य बचाना है तो हर हाल में आरक्षण हासिल करो। लेकिन इसी आंदोलन की आड़ में भड़की आग ने हजारों घरों में रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है। उपद्रव की आग में अकेले रोहतक शहर में 2200 कर्मचारियों का रोजगार लूट गया।
राख हुए फैक्ट्रियों और शोरूम ने शहर के सामने रोटी की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि फैक्ट्रियों में दोबारा उत्पादन शुरू होने में कम से कम छह महीने तक का समय लगेगा। वहीं, शोरूम के जलने की कालिख भी एक साल से पहले साफ नहीं होगी। इससे इन सभी जगहों पर काम करने वालों के सामने सबसे बड़ी समस्या हो सकती है। दुकानों व प्रतिष्ठानों को आग लगाने के कारण भी काफी लोगों का रोजगार छिनता दिख रहा है।
शहर में उपद्रवियों ने दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों को ही नहीं जलाया है। बल्कि फैक्ट्रियों व शोरूम तक को तोड़फोड़ करने के बाद जलाकर राख कर दिया है। उद्योगपतियों और व्यापारियों को तो बड़ा नुकसान हुआ ही है, लेकिन इन जगहों पर नौकरी करने वालों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
अकेले शहर में ऐसे 2200 से ज्यादा कर्मचारी हैं, जिन्हें अपनों ने ही बेरोजगार कर दिया। इनमें लगभग 800 लोग ऐसे हैं, जो फैक्ट्रियों में काम करते हैं। 1200 लोग शोरूम में नौकरी करते थे। वहीं 200 से लेकर 500 तक लोग उन दुकानों पर नौकरी करते है, जिनको आग के हवाले किया गया है।
इन सभी के सामने रोजगार का संकट इसलिए गहराया है, क्योंकि फैक्ट्रियों में अगले छह माह तक उत्पादन होता नहीं दिख रहा है। फैक्ट्री में विदेश से पार्ट्स आने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। स्वाह हुए शोरूम में भी सालभर पहले काम शुरू नहीं होगा। उनको दोबारा खड़ा करने में व्यापारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। जिससे वहां नौकरी करने वालों के लिए ही परेशानी होगी।
क्योंकि व्यापारी उनको तनख्वाह तक देने के लाले पड़ने की बात कह रहे हैं। अब देखना है कि उद्यमी और व्यापारी संकट की इस घड़ी में इन लोगों का रोजगार बचा पाते हैं या नहीं।
जल्द मुआवजा मिले तो रोजगार बचने की उम्मीदअब सरकार से ही उम्मीद बाकी है। क्योंकि उपद्रव की भेंट चढ़े उद्योगों व व्यापार को खड़ा करने के लिए सरकार की ओर से नुकसान की भरपाई जल्द हो जाती है तो हालात बदल सकते हैं। उद्यमियों की मानें तो सरकार अगर 15 दिन में कुछ भरपाई करे तो नौकरी करने वालों को तनख्वाह दी जा सकती है और वे धीरे-धीरे अपना उद्योग शुरू कर सकते हैं। ऐसे में सभी के घरों के चूल्हे भी जलते रहेंगे।
उपद्रव में शोरूम जलकर पूरी तरह से राख हो गया है। जिससे यहां नौकरी करने वालों की तनख्वाह तक के लाले पड़ गए हैं। अगर सरकार नुकसान की भरपाई जल्द कर देती है तो कुछ सहारा मिल सकता है। इससे नौकरी करने वालों के लिए भी परेशानी नहीं होगी।
जगमोहन मित्तल, अध्यक्ष हरियाणा ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन।फैक्ट्री में उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। मशीन और पूर्जों को विदेश से मंगवाया जाएगा। जिसमें अभी कुछ नहीं कहा जा सकता कि कितना समय लगेगा। अकेली हमारी फैक्ट्री में 450 से ज्यादा लोग काम करते हैं। अब वे भी परेशानी में फंस गए हैं। उमेश गंभीर, मार्केटिंग हेड माइक्रोन प्रसेशन स्क्रूज लिमिटेड दिल्ली रोड