रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू नहीं हो पा रहा है। सरकार की घोषणा व बजट में प्रावधान के बावजूद योजना अधर में लटकी हुई है। संस्थान में यह केंद्र शुरू करने के लिए लिवर सर्जन की सख्त जरूरत है। यहां करीब चार माह पूर्व आई लिवर सर्जन बगैर कोई ट्रांसप्लांट किए पिछले माह ही नौकरी छोड़कर जा चुकी हैं। ऐसे में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अभी और इंतजार करना होगा।
पीजीआईएमएस में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए लगभग सभी तैयारियां की जा चुकी हैं। ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने के लिए अब यहां लिवर सर्जन की जरूरत है। इसके बाद ही यहां लिवर ट्रांसप्लांट शुरू हो सकेगा। हालांकि, करीब चार माह पूर्व लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू करने का प्रयास हुआ था। इसके तहत संस्थान से सेवानिवृत्त एक चिकित्सक की बेटी को नियुक्ति दी गई थी। महिला चिकित्सक तीन माह तक अच्छा खासा वेतन लेकर बगैर कोई ऑपरेशन या सेंटर शुरू किए ही नौकरी छोड़ कर चकी गईं। अब यह एक निजी संस्थान में सेवाएं दे रही हैं। महिला सर्जन के जाने से आम आदमी की लिवर ट्रांसप्लांट संबंधी राहत की आस भी अधूरी रह गई है। ऐसे में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अब फिर से सर्जन की तलाश करनी होगी। इस जद्दोजहद में कितना समय लगेगा, कहा नहीं जा सकता है। संवाद
संस्थान में लिवर सर्जन थी। वह तीन महीने बाद नौकरी छोड़ गई। लिवर ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए खाली पदों को भरने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए भर्ती निकाली गई है। जल्द ही पीजीआई में लिवर ट्रांसप्लांट शुरू किया जाएगा।
- डॉ. एसके सिघंल, निदेशक पीजीआईएमएस।