03 एमडीयू में आयोजित बैठक में संबोधित करते कुलपति प्रो. राजबीर सिंह। स्रोत: एमडीयू
रोहतक। पुस्तकालय किसी भी विश्वविद्यालय का हृदय है। यह वह स्थान है जहां ज्ञान, शोध और नवाचार का संगम होता है। हमें इसे न केवल पुस्तकों का भंडार, बल्कि एक जीवंत ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना है। ऐसा कहना है कुलपति प्रो. राजबीर सिंह का। वे शुक्रवार को एमडीयू की पुस्तकालय समिति की बैठक की अध्यक्षता विवेकानंद पुस्तकालय समिति कक्ष में कर रहे थे।
बैठक में पुस्तकालयों के डिजिटलीकरण, नई पुस्तकों व ई-संसाधनों की खरीद, शोधार्थियों के लिए विशेष अध्ययन कक्ष की स्थापना व ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में लाइब्रेरियन डॉ. सतीश मलिक ने बताया कि ज्ञान संसाधनों के संवर्धन हेतु वर्ष 2025-26 में पुस्तकालय के लिए 8 करोड़ रुपये आवंटित हैं।
वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में विवेकानंद पुस्तकालय व उससे जुड़े पांच सैटेलाइट पुस्तकालयों-आईएचटीएम, इमसार, लॉ, मैथ्स व यूआईईटी के माध्यम से शैक्षिक समुदाय की सेवा पर प्रकाश डाला गया।