30सीटीके39...जनता कॉलोनी स्थित जैन स्थानक में लब्धि जैन के साध्वी बनने से पहले बान रस्म के द
रोहतक। जनता कॉलोनी स्थित जैन स्थानक में दीक्षा महोत्सव मनाया जा रहा है। यहां मंगल गीत गाती महिलाओं व संतों के मार्गदर्शन में शुक्रवार को लब्धि जैन की बान की रस्म निभाई गई। जैन समाज के पूर्व प्रधान संजय जैन ने बान दिया। उनके घर रस्म अदायगी की गई। पारंपरिक रीति रिवाजों के तहत महिलाओं ने गीत गाए व नाच गाकर खुशी मनाई।
ज्योतिष मार्तंड महाप्रज्ञा ने कहा कि जीवन का उद्देश्य खाना-पीना व सोना ही नहीं है, इंद्रियों को संयम में रखने वाला ही वैराग्य धारण कर सकता है। भौतिक सुखों का त्याग करने वाला ही संयम मार्ग पर चल सकता है। ऐसा करना हर किसी के बस का नहीं है।
साध्वी ने कहा कि सुख सुविधाओं को त्याग कर ही कोई व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है। इंद्रियों पर नियंत्रण से ही हम खुद को सार्थक बना सकते हैं। आम इंसान संन्यास नहीं ले सकता है। यह चुनाव प्रकृति स्वयं करती है। संयम मार्ग पर चलने के लिए आत्मा को पवित्र बनाना होता है। दीक्षा जबरन नहीं दी जा सकती है। यह आत्मा के उत्थान का मार्ग है।
लब्धि वैराग्य के मार्ग पर चलने वाली हजारों में से एक हैं। वर्ष 2014 में लब्धि छह वर्ष की थीं। उस समय वह विहार के लिए आए संतों के संपर्क में आई थीं। उसी समय उनके मन में वैराग्य धारण करने का विचार आया था। उसने कहा था कि बुआ व बहन की तरह बनना है। इसके बाद उसे अपने साथ रखते हुए उसकी परीक्षा ली गई। वह संन्यास के कठिन मार्ग पर चलने के लिए समक्ष हैं या नहीं, यह परखा गया। इसके लिए पैदल विहार व अन्य त्याग की कसौटी पर उसे परखा गया। इन पर वह खरी उतरी, इसलिए अब दीक्षा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। यह सब परिवार व वैराग्य धारण करने वाले की सहमति से ही संभव है।